मुंबई: 5 महीने की लंबी लड़ाई के बाद 700 ग्राम के प्रीमेच्योर बच्चे को मिली नई जिंदगी
मुंबई, 8 नवंबर (आईएएनएस)। नवजात शिशु देखभाल (नियोनेटल केयर) के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक सरकारी अस्पताल ने समय से पहले जन्मे एक बच्चे को 5 महीने की लंबी लड़ाई के बाद नई जिंदगी दी है।
जन्म के समय, इस बच्चे का वजन केवल 700 ग्राम था।
बच्चे की नाजुक हालत को देखते हुए उसे मुंबई के केईएम अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में भर्ती कराया गया था।
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा संचालित इस अस्पताल और मेडिकल कॉलेज ने 5 महीने तक 700 ग्राम के इस बच्चे की देखभाल की। रविवार को जब उसका वजन 3.3 किलोग्राम हो गया, तो उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल ने एक बयान में कहा कि नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में 5 महीने बिताने के बाद, बच्चा 3.3 किलोग्राम वजन के साथ घर गया है और वह पूरी तरह से मां का दूध पी रहा है।
नवजात शिशुओं को नया जीवन देने वाली यह नवजात देखभाल (नियोनेटल केयर), नियोनेटोलॉजी विभाग की प्रमुख अनीता हरिबालकृष्ण की देखरेख में की गई। इसमें एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया शामिल थी, जिसके लिए गहन देखभाल (इंटेंसिव केयर) और श्वसन सहायता (रेस्पिरेटरी सपोर्ट) की आवश्यकता थी।
डॉक्टर ने बताया कि बच्चे ने जानलेवा जटिलताओं का सामना किया। लगातार निगरानी, कई विशेषज्ञों की मिली-जुली देखभाल, और समर्पित मेडिकल व नर्सिंग सपोर्ट की मदद से इन जटिलताओं पर धीरे-धीरे काबू पा लिया गया।
अस्पताल ने कहा कि बच्चे का सफलतापूर्वक अस्पताल से डिस्चार्ज होना, केईएम अस्पताल में उपलब्ध विशेष नवजात देखभाल की गुणवत्ता को दर्शाता है। यह अस्पताल की एनआईसीयू सुविधाओं, डॉक्टरों की विशेषज्ञता, बेहतरीन टीम वर्क और मरीजों की लगातार देखभाल करने की सामूहिक ताकत का परिणाम है, जिसकी मदद से सबसे नाजुक नवजात शिशुओं का इलाज संभव हो पाता है।
गौरतलब है कि नवजात देखभाल के क्षेत्र में यह कोई पहली बड़ी उपलब्धि या मिसाल नहीं है।
इस साल मार्च में, नागपुर के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञों ने 700 ग्राम वजन वाले एक और बच्चे की जान बचाई थी, जिसका जन्म 26 सप्ताह में ही समय से पहले (प्रीमेच्योर) हो गया था।
एनआईसीयू में 100 दिनों की सघन देखभाल और चौबीसों घंटे निगरानी के बाद, डॉक्टर बच्चे को बचाने में सफल रहे। जब बच्चे का वजन 1.88 किलोग्राम हो गया, तो उसे स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों के अनुसार, समय से पहले जन्मे इस बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी, और जन्मजात हृदय संबंधी समस्याओं का भी इलाज किया गया।
चौबीसों घंटे देखभाल की बदौलत बच्चे का वजन और स्वास्थ्य बेहतर हुआ। यह डॉक्टरों की समर्पित कोशिशों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।
--आईएएनएस
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