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मध्य प्रदेश सरकार आरटीओ चेक पोस्ट पर हाईकोर्ट के आदेश को देगी चुनौती : परिवहन मंत्री

भोपाल, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने सोमवार को कहा कि प्रदेश सरकार सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) चेक पोस्ट को फिर से खोलने के हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि डिवीजन बेंच में जाने से पहले कानूनी राय ली जा रही है।
मध्य प्रदेश सरकार आरटीओ चेक पोस्ट पर हाईकोर्ट के आदेश को देगी चुनौती : परिवहन मंत्री

भोपाल, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने सोमवार को कहा कि प्रदेश सरकार सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) चेक पोस्ट को फिर से खोलने के हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि डिवीजन बेंच में जाने से पहले कानूनी राय ली जा रही है।

मंत्री उदय प्रताप ने राज्य विधानसभा में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हमने विधि विभाग और महाधिवक्ता से मार्गदर्शन मांगा है। सरकार अदालत में अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने संकेत दिया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील तैयार की जा रही है।

हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने 22 अप्रैल को रजनीश त्रिपाठी की अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह 30 दिनों के भीतर सभी बंद पड़े चेक पोस्ट शुरू करे।

न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की बेंच ने कहा कि भारी वाहनों की निगरानी करने, ओवरलोडिंग को रोकने और परिवहन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भौतिक चेक पोस्ट बहुत जरूरी हैं।

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले आश्वासन दिया था कि चेक पोस्ट चालू रहेंगे, लेकिन बाद में 30 जून, 2024 को उन्हें बंद कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इसे अदालत के पिछले निर्देशों और सरकार के अपने ही आश्वासन, दोनों का उल्लंघन बताया।

आदेश में यह भी कहा गया कि चेक पोस्ट बंद होने से नियमों को लागू करने की प्रक्रिया कमजोर हुई है, सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा है, और बिना अनुमति के चलने वाले परिवहन कार्यों में बढ़ोतरी हुई है।

राज्य सरकार द्वारा मोबाइल निगरानी इकाइयों और बिना आमने-सामने आए निगरानी (फेसलेस मॉनिटरिंग) प्रणाली पर निर्भरता को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि ये विकल्प असरदार नहीं हैं। सरकार के आश्वासन का वही कानूनी महत्व होता है जो किसी न्यायिक आदेश का होता है, और इसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

2025 में दायर की गई इस जनहित याचिका (पीआईएल) में चेक पोस्ट बंद होने के बाद सड़क सुरक्षा और नियमों को लागू करने में आई कमियों को लेकर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि ओवरलोड वाहन सड़कों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, और बिना परमिट के वाहन चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन के मामले काफी बढ़ गए हैं।

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि उसके निर्देश अनिवार्य हैं और चेतावनी दी कि तय समय सीमा के भीतर निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में लिए गए एक नीतिगत फैसले के बाद, प्रदेश भर में चेक पोस्ट को मूल रूप से 1 जुलाई, 2024 से बंद कर दिया गया था। सरकार ने इसके विकल्प के तौर पर मोबाइल इकाइयों और कुछ तय जगहों पर जांच करने की एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव रखा था।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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