मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ की तैयारियों के लिए शिप्रा घाटों तक पहुंचने वाली 18 सड़कों की पहचान की
उज्जैन, 14 मई (आईएएनएस)। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन में सिहंस्थ 2028 के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की तैयारियों के तहत, शिप्रा नदी के किनारे घाटों तक पहुंचने के लिए नई सड़कें बनाने के लिए 18 जगहों की पहचान की है।
प्रस्तावित सड़कें शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर के दायरे में फैले नए बने घाटों को आपस में जोड़ेंगी, जिससे धार्मिक समागम के दौरान लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम हो सकेगी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस परियोजना में व्यवस्थित पार्किंग सुविधाओं और स्नान क्षेत्रों तक पैदल पहुंचने के लिए बेहतर रास्तों की योजनाएं भी शामिल हैं।
बयान में कहा गया है, "सभी विभागों ने सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों की गति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री यादव नियमित रूप से तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं, ताजा जानकारी ले रहे हैं और आवश्यक निर्देश जारी कर रहे हैं।"
संभागीय आयुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और कई विभागों के अधिकारियों के साथ मिलकर, मेला क्षेत्र में नियमित निरीक्षण कर रहे हैं ताकि बुनियादी ढांचे की जरूरतों और कार्यों की प्रगति का आकलन किया जा सके।
गुरुवार को एक ताजा निरीक्षण के दौरान, अधिकारियों ने अपना सर्वेक्षण श्री विक्रांत भैरव मंदिर के पास बने पुल से शुरू किया और नदी के किनारे-किनारे पैदल चलकर लगभग पांच किलोमीटर का क्षेत्र तय किया।
बयान में कहा गया है, "एप्रोच सड़कों (पहुंच मार्गों) के लिए चिन्हित किए गए 18 स्थान, नए विकसित घाटों को उन्हेल रोड पुल क्षेत्र तक आपस में जोड़ेंगे।"
अधिकारियों ने बताया कि इसका उद्देश्य पार्किंग क्षेत्रों और स्नान घाटों के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करना है, ताकि मेला अवधि के दौरान श्रद्धालु आसानी से आवाजाही कर सकें।
इस प्रक्रिया के दौरान, घाटों तक पहुंचने वाले प्रस्तावित मार्गों के लिए लगभग 140 अतिरिक्त स्थानों की पहचान की गई, और विभागों को प्रारंभिक कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए।
प्रस्तावित पहुंच बिंदुओं में गौ घाट के पास, वेधशाला के पीछे, वाकणकर पुल, जीवन खेड़ी और श्री शनि मंदिर के पास के क्षेत्र शामिल हैं; इसके अलावा निरीक्षण के दायरे में लाल पुल के नीचे का घाट क्षेत्र भी शामिल था।
सरकार ने बताया कि मौजूदा और नए बने, दोनों तरह के घाटों को इस संपर्क योजना में एकीकृत किया जा रहा है, और अधिकांश पहुंच मार्गों का प्रस्ताव नदी के किनारों से 200 मीटर के दायरे के भीतर ही रखा गया है।
--आईएएनएस
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