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गृह मंत्री शाह के भोपाल दौरे से पहले एमपी कांग्रेस ने डेयरी कोऑपरेटिव में गिरावट पर सवाल उठाए

गृह मंत्री शाह के भोपाल दौरे से पहले एमपी कांग्रेस ने डेयरी कोऑपरेटिव में गिरावट पर सवाल उठाए
गृह मंत्री शाह के भोपाल दौरे से पहले एमपी कांग्रेस ने डेयरी कोऑपरेटिव में गिरावट पर सवाल उठाए

भोपाल, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने शुक्रवार को राज्य के डेयरी कोऑपरेटिव नेटवर्क में आई गिरावट पर सवाल उठाए और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे से एक दिन पहले 'सांची' डेयरी सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार के प्रयासों की जानकारी मांगी।

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक बयान में दावा किया कि डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियों की संख्या 2019-20 में 7,811 से घटकर 2024-25 में 5,502 हो गई है, जबकि उनकी मेंबरशिप 2.68 लाख से घटकर लगभग 2.09 लाख रह गई है।

शुक्रवार को उन्होंने पूछा कि इस गिरावट के लिए कौन जिम्मेदार है और अभी क्या स्थिति है।

उन्होंने रोजाना दूध की खरीद को 10.50 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 20 लाख किलोग्राम करने के लक्ष्य पर भी सवाल उठाए और 2025 में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ राज्य के समझौते के बाद हुई प्रगति की जानकारी मांगी।

गृह मंत्री शाह शुक्रवार रात भोपाल पहुंचेंगे और लगभग 23 घंटे तक वहां रहेंगे। शनिवार को वह बीएचईएल दशहरा मैदान में राज्य-स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल होंगे, जिसमें 35,000 से ज्यादा पशुपालक और डेयरी कोऑपरेटिव सदस्य हिस्सा लेंगे।

गृह मंत्री शाह भोपाल और इंदौर मिल्क यूनियन से जुड़े डेयरी किसानों को बोनस देंगे, गौशालाओं को मदद देंगे, गोपालक दीदियों को सम्मानित करेंगे और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत मंजूरी पत्र बांटेंगे।

मध्य प्रदेश सरकार के बयान के अनुसार, वह भोपाल कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन परिसर में फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स प्लांट का उद्घाटन भी करेंगे।

दूसरी ओर, पटवारी ने कहा कि सरकार को सिर्फ डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के बजाय किसानों की आय पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दूध की कीमतों में क्षेत्रीय अंतर पर सवाल उठाए और उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत और किसानों को मिलने वाली राशि के बीच के अंतर में पारदर्शिता की मांग की।

पटवारी ने कहा कि किसान को दूध की सही कीमत, समय पर भुगतान और एक मजबूत कोऑपरेटिव सिस्टम की जरूरत है। जब तक डेयरी किसानों की आय नहीं बढ़ती, तब तक प्लांट बनाना विकास का पैमाना नहीं हो सकता। उन्होंने चारे, पशु आहार, दवाओं, पशु चिकित्सा और मजदूरी की बढ़ती लागत का भी जिक्र किया और दूध उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए एक ठोस योजना की मांग की।

--आईएएनएस

डीकेएम/एएस

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