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मजबूत मांग के चलते वित्त वर्ष 2027 में भारत की वृद्धि दर अनुमान से अधिक रह सकती है: मॉर्गन स्टैनली

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट में सोमवार को कहा गया कि भारत में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मजबूत बनी रहने की उम्मीद है और घरेलू और वैश्विक दोनों तरह की मांग के समर्थन के चलते वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के पूर्वानुमान में बढ़ोतरी की संभावना है।
मजबूत मांग के चलते वित्त वर्ष 2027 में भारत की वृद्धि दर अनुमान से अधिक रह सकती है: मॉर्गन स्टैनली

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट में सोमवार को कहा गया कि भारत में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मजबूत बनी रहने की उम्मीद है और घरेलू और वैश्विक दोनों तरह की मांग के समर्थन के चलते वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के पूर्वानुमान में बढ़ोतरी की संभावना है।

एक बयान में, वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि वह वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की विकास संभावनाओं को लेकर सकारात्मक बनी हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया, "हाल के उच्च आवृत्ति संकेतक मजबूत बने हुए हैं, जो घरेलू मांग में सुधार का संकेत देते हैं। हमें उम्मीद है कि अनुकूल व्यापक आर्थिक स्थिरता के माहौल में नीतियां विकास के समर्थन में बनी रहेंगी।"

बाहरी मांग के मोर्चे पर भी सुधार की उम्मीद जताई गई है, खासकर वस्तु निर्यात के क्षेत्र में। हाल ही में शुल्क दरें अपने 50 प्रतिशत के उच्च स्तर से काफी कम हुई हैं और भारत ने कई मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

संशोधित जीडीपी सीरीज के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी और वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) दोनों 7.8 प्रतिशत रहे, जो पिछली तिमाही की तुलना में थोड़े कम हैं।

सरकार ने जीडीपी की गणना के लिए आधार वर्ष में संशोधन किया है। नया आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है, जो पहले 2011-12 था। यह बदलाव अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए किया गया है। संशोधित आंकड़े जून 2022 तिमाही से उपलब्ध कराए गए हैं।

नया आधार वर्ष अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि दर का अधिक सटीक अनुमान लगाने में मदद करेगा। इसमें असंगठित और डिजिटल क्षेत्र के बेहतर आकलन, दोहरी अपस्फीति जैसी उन्नत पद्धतियों, आपूर्ति और उपयोग टेबल फ्रेम तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बेहतर डेटा पद्धतियों को शामिल किया गया है। साथ ही जीएसटी संग्रह, ई-वाहन आंकड़े और सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) जैसे नए स्रोतों को भी जोड़ा गया है।

पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत आंकी गई है, जो पुराने आधार वर्ष के अनुसार अनुमानित 7.4 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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