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आंध्र प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 17 अगस्त से होगा शुरू

आंध्र प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 17 अगस्त से होगा शुरू
आंध्र प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 17 अगस्त से होगा शुरू

अमरावती, 16 अगस्त (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होगा। इस दौरान एल नीनो के प्रभाव, किसानों से जुड़े मुद्दों और अमरावती राजधानी परियोजना के कामों की प्रगति सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों का मानसून सत्र बुलाया है। राज्य की एकमात्र विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पहले ही यह फैसला कर चुकी है कि विपक्ष के नेता (एलओपी) का दर्जा नहीं दिए जाने के विरोध में वह विधानसभा का बहिष्कार जारी रखेगी।

पार्टी ने विधान परिषद में जनहित के मुद्दे उठाने का फैसला किया है। उसने शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित मेगा डीएससी-2025 में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की भी घोषणा की है।

विधानसभा अध्यक्ष चिंतकायला अय्यन्ना पात्रुडु ने रविवार को कहा कि सत्र के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

अय्यन्ना पात्रुडु ने कहा कि यदि वाईएसआरसीपी के सदस्य सत्र में भाग लेते हैं और जनहित के मुद्दे उठाते हैं, तो संबंधित मंत्रियों से जवाब दिलाने की जिम्मेदारी वह स्वयं लेंगे।

उन्होंने कहा कि वाईएसआरसीपी प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी और अन्य पार्टी विधायकों की जिम्मेदारी है कि वे सत्र में शामिल हों। उन्होंने कहा कि उन्हें सदन में आकर सवाल उठाने चाहिए।

पिछले सप्ताह विधानसभा अध्यक्ष ने सवाल किया था कि जो वाईएसआरसीपी विधायक विधानसभा सत्र में शामिल नहीं होने का फैसला कर चुके हैं, उन्हें वेतन क्यों दिया जाए। उन्होंने कहा था कि विधायकों को जनता के मुद्दों पर चर्चा करने और अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याएं विधानसभा में उठाने के लिए चुना जाता है।

उन्होंने कहा कि जो विधायक विधानसभा सत्र में भाग नहीं लेते, उन्हें वेतन नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए और इसके लिए उचित कानून बनाया जाना चाहिए।

वाईएसआरसीपी पिछले लगभग दो वर्षों से विपक्ष के नेता का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर विधानसभा का बहिष्कार कर रही है।

12 अगस्त को वाईएसआरसीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने कहा था कि विपक्ष के नेता का दर्जा मिले बिना पार्टी सदस्यों के लिए विधानसभा सत्र में भाग लेने का कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए वाईएसआरसीपी को विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं देना चाहती।

पार्टी विधायकों की बैठक को संबोधित करते हुए जगन मोहन रेड्डी ने एमएलसी को सतर्क रहने और विधान परिषद में जनहित के मुद्दे उठाने तथा नायडू सरकार की विफलताओं को उजागर करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा, "परिषद में हमारी संख्या अच्छी है, इसलिए हमें जनता की आवाज बनना चाहिए और उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए जिन्हें हम लगातार उठा रहे हैं। इनमें डीएससी भर्ती में कथित अनियमितताएं भी शामिल हैं, जिस पर हमने पिछले 74 दिनों में 10 तरह के विरोध प्रदर्शन किए हैं और अपने पक्ष के समर्थन में सबूत भी पेश किए हैं।"

उन्होंने कहा, "हमने पेपर लीक और आउटसोर्सिंग घोटालों, खेल कोटा में कथित अनियमितताओं और सरकारी आदेशों में बदलाव जैसे मामलों को उजागर किया है। साथ ही मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के पुत्र और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश की कथित भूमिका की सीबीआई जांच की मांग भी की है।"

वाईएसआरसीपी प्रमुख ने पार्टी विधायकों से कहा कि उन्हें फीस प्रतिपूर्ति (फीस रीइम्बर्समेंट) और 'वसति दीवेना' योजना का मुद्दा भी उठाना चाहिए, क्योंकि इन योजनाओं के तहत क्रमशः 9,100 करोड़ रुपए और 3,300 करोड़ रुपए से अधिक के बकाया भुगतान लंबित हैं, जिससे छात्रों पर बुरा असर पड़ रहा है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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