केरल: वायनाड पुनर्वास परियोजना में नए घरों पर दरारों के बीच मंत्री का दौरा, उठे सवाल
कलपेट्टा, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल के वायनाड में भूस्खलन पीड़ितों के पुनर्वास को लेकर चिंताएं और गहरा गई हैं। राज्य के राजस्व मंत्री के. राजन ने शनिवार को एल्स्टन एस्टेट स्थित टाउनशिप परियोजना का दौरा किया, जिसके बाद निर्माण गुणवत्ता, देरी और जवाबदेही को लेकर नई बहस छिड़ गई।
मंत्री ने मुंडक्कई–चूरलमाला पुनर्वास टाउनशिप में एक घर का निरीक्षण किया, जहां दरारें होने की खबरें सामने आई थीं। उनके साथ सत्तारूढ़ वामपंथी दल के स्थानीय नेता भी मौजूद रहे। संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया।
निरीक्षण के दौरान छत पर सीपेज (पानी के रिसाव) के निशान दिखे, हालांकि मंत्री राजन ने संरचनात्मक दरारों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल पानी के दाग हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक घर लाभार्थियों को औपचारिक रूप से सौंपे नहीं गए हैं और फिलहाल केवल भूमि के पट्टे वितरित किए गए हैं।
उन्होंने कहा, “यदि हैंडओवर के बाद कोई समस्या आती है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और ठेकेदार को अनुबंध के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाएगा।” साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगी।
करीब 410 घरों वाली यह परियोजना अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है। तय समय सीमा में काम पूरा न होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है।
इस बीच, यूथ कांग्रेस ने परियोजना स्थल पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
गौरतलब है कि जुलाई 2024 में आए विनाशकारी भूस्खलन के बाद सैकड़ों लोग बेघर हो गए थे। अब भी कई पीड़ित स्थायी आवास का इंतजार कर रहे हैं।
शुरुआत में 1,000 से अधिक परिवारों को पुनर्वास के लिए चिन्हित किया गया था, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 451 रह गई है, जिससे पारदर्शिता और पात्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। करीब 30 लाख रुपये की लागत से बने इन घरों में बसने से पहले ही नुकसान के संकेत मिलने की खबरें हैं। आधिकारिक दावों के अनुसार 170 से अधिक घर पूरे हो चुके हैं, लेकिन जमीनी रिपोर्ट्स बताती हैं कि इनमें से बहुत कम ही रहने लायक हैं और कई में बुनियादी काम भी अधूरा है।
इसके अलावा, आपदा के बाद मिले करोड़ों रुपये के फंड के उपयोग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्पष्ट हिसाब-किताब के अभाव में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिसका सबूत अधूरी आधारभूत सुविधाएं और खराब निर्माण गुणवत्ता है।
सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और बागान श्रमिकों जैसे अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित लोगों की आजीविका का मुद्दा भी अब तक अनदेखा है।
राज्य सरकार जहां अपनी स्थिति का बचाव करते हुए सुधार के आश्वासन दे रही है, वहीं जमीन पर दिख रही खामियां पीड़ितों की चिंताओं को और बढ़ा रही हैं।
--आईएएनएस
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