तमिलनाडु के मंत्री निर्मल कुमार ने डीएमके पर कावेरी का पानी छोड़े जाने में बाधा डालने का लगाया आरोप
चेन्नई, 2 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मंत्री निर्मल कुमार ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पर आरोप लगाया है कि वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ मिलकर राज्य को कावेरी का पानी मिलने में रुकावटें पैदा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी नहीं चाहती कि लंबे समय से चले आ रहे अंतर-राज्यीय जल विवाद को सुलझाने का राजनीतिक श्रेय मुख्यमंत्री विजय को मिले।
चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि डीएमके, विजय सरकार को कावेरी के पानी में तमिलनाडु का जायज हिस्सा हासिल करने से रोकने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ये हरकतें राजनीतिक मकसद से प्रेरित हैं और इनका मकसद मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर जनता से मिलने वाली वाहवाही से रोकना है। निर्मल कुमार ने आरोप लगाया, "डीएमके नहीं चाहती कि मुख्यमंत्री विजय को जनता के बीच अच्छी छवि मिले। इसीलिए वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ मिलकर कावेरी मुद्दे पर अड़चनें पैदा कर रही है।"
मंत्री ने कावेरी विवाद पर एआईएडीएमके के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पार्टी ने तमिलनाडु विधानसभा में अपना विरोध दर्ज कराने और इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के बजाय अदालत का दरवाजा खटखटाने का रास्ता क्यों चुना?
कावेरी विवाद पर सर्वदलीय बैठक की मांग का जिक्र करते हुए निर्मल कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर तमिलनाडु में राजनीतिक एकता की कमी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेदों की वजह से कावेरी के पानी में राज्य के जायज हिस्से को हासिल करने की कोशिशें कमजोर नहीं होनी चाहिए।
डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री विजय राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि ऐसे बयानों का तमिलनाडु या वहां के लोगों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विपक्षी दलों की राजनीतिक आलोचना के बावजूद सरकार राज्य के पानी के अधिकारों के लिए प्रयास जारी रखेगी।
निर्मल कुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार पर भी निशाना साधा और सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस नेतृत्व कावेरी मुद्दे पर उन्हें प्रभावित करने की स्थिति में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिवकुमार पानी के बंटवारे के विवाद पर कांग्रेस आलाकमान की बात सुनने को तैयार नहीं थे और दावा किया कि कर्नाटक के नेता स्टालिन की बात मानने के लिए ज़्यादा इच्छुक थे।
मंत्री की ये टिप्पणियां तमिलनाडु में कावेरी विवाद को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच आई हैं, जिसमें पार्टियां इस बात को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं कि राज्य को कर्नाटक से पानी का तय हिस्सा दिलाने के लिए क्या रणनीति अपनाई जानी चाहिए। यह मुद्दा एक बार फिर एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है, जिसमें सत्ताधारी और विपक्षी खेमे एक-दूसरे पर तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं।
--आईएएनएस
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