Samachar Nama
×

लाखों विस्थापित, हजारों हिरासत में: पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने अफगानों पर भारी मानवीय क्षति पहुंचाई

लाखों विस्थापित, हजारों हिरासत में: पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने अफगानों पर भारी मानवीय क्षति पहुंचाई
लाखों विस्थापित, हजारों हिरासत में: पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने अफगानों पर भारी मानवीय क्षति पहुंचाई

काबुल, 25 सितंबर (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने अफगान नागरिकों पर भारी मानवीय क्षति पहुंचाई है। इन कार्रवाइयों में लाखों शरणार्थी विस्थापित हुए, हजारों हिरासत में लिए गए, छात्रों को निष्कासन का सामना करना पड़ा, पत्रकारों पर जबरन वापसी का खतरा मंडरा रहा है, और सैन्य अभियानों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि ये घटनाक्रम इस्लामाबाद और काबुल के बीच तात्कालिक सुरक्षा विवाद से कहीं अधिक व्यापक मानवीय संकट की ओर इशारा करते हैं।

अफगानिस्तान की प्रमुख समाचार एजेंसी, खामा प्रेस की एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया कि किसी शरणार्थी को उसकी राष्ट्रीयता के कारण आतंकवादी नहीं बना दिया जाता। किसी मेडिकल छात्र को काबुल और इस्लामाबाद के बीच संबंधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सुरक्षा की मांग करने वाला पत्रकार केवल इसलिए सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है क्योंकि वह अफगान है। और अफगानिस्तान के भीतर रहने वाले नागरिकों का संरक्षित दर्जा इसलिए नहीं छिन जाता क्योंकि सशस्त्र समूह देश में कहीं और सक्रिय हो सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा की परीक्षा न केवल उन खतरों से होती है जिनका सामना कोई राज्य करता है, बल्कि उन सीमाओं से भी होती है जिन्हें वह उनका सामना करते समय पार करने से इनकार करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और आत्मरक्षा के नाम पर अफगानिस्तान के साथ अपने टकराव को लगातार उचित ठहरा रहा है और तालिबान अधिकारियों पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य आतंकवादी समूहों को अफगान धरती पर पनाह देने का आरोप लगा रहा है। हालांकि, काबुल ने इन आरोपों का बार-बार खंडन किया है।

लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी बयानबाजी से परे, शरणार्थियों, बच्चों, छात्रों, पत्रकारों, रोगियों, व्यापारियों और परिवारों सहित आम अफगानों को बार-बार इसके परिणाम भुगतने पड़े हैं।

रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि यह सिलसिला सिर्फ युद्धक्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। पाकिस्तानी शहरों में घरों की तलाशी से लेकर निर्वासन के दौरान बिछड़े परिवारों तक, विश्वविद्यालयों से निकाले गए अफगान छात्रों से लेकर तालिबान सरकार में वापस लौटने का सामना कर रहे पत्रकारों तक, आजीविका में बाधा डालने वाले सीमा प्रतिबंधों से लेकर अफगानिस्तान के अंदर पाकिस्तानी सैन्य अभियानों में हुई भारी नागरिक मौतों तक, हर जगह देखने को मिलता है।

पाकिस्तान की मेडिकल और डेंटल काउंसिल ने 1 सितंबर को चिकित्सा और दंत चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे अफगान छात्रों को अफगानिस्तान लौटने का निर्देश दिया, साथ ही मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए नए अफगान छात्रों के प्रवेश पर रोक लगा दी।

खामा प्रेस के अनुसार, पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, लाहौर में लगभग 100 अफगान छात्र प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें अनुमानित 20 से 40 महिलाएं शामिल हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि अफगान महिलाओं के लिए इसके परिणाम विशेष रूप से गंभीर हैं। तालिबान के प्रतिबंधों ने अफगानिस्तान के अंदर महिलाओं को विश्वविद्यालयों और चिकित्सा शिक्षा से पूरी तरह से वंचित कर दिया है। इसलिए, एक महिला मेडिकल छात्रा का वापस लौटना सिर्फ देश बदलना नहीं है; कई महिलाओं के लिए इसका मतलब उनकी पूरी शिक्षा का अंत हो सकता है।

--आईएएनएस

एमएस/

Share this story

Tags