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2014 में शेख हसीना से मुलाकात कर निष्पक्ष चुनाव का महत्व बताया था: पूर्व सीईसी एस.वाई. कुरैशी

2014 में शेख हसीना से मुलाकात कर निष्पक्ष चुनाव का महत्व बताया था: पूर्व सीईसी एस.वाई. कुरैशी
2014 में शेख हसीना से मुलाकात कर निष्पक्ष चुनाव का महत्व बताया था: पूर्व सीईसी एस.वाई. कुरैशी

नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एसवाई कुरैशी ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2014 में उन्होंने बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात कर उन्हें चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनाए रखने के महत्व के बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में शेख हसीना इस विषय पर कुछ रक्षात्मक रुख में थीं, लेकिन उन्होंने उनकी बातों को गंभीरता से सुना।

आईएएनएस से विशेष बातचीत में कुरैशी ने बताया कि वर्ष 2014 में वह सेवानिवृत्त हो चुके थे और एक व्याख्यान के सिलसिले में बांग्लादेश गए थे। इसी दौरान भारत में तत्कालीन बांग्लादेशी उच्चायुक्त ने उनसे अनुरोध किया कि यदि उनकी शेख हसीना से मुलाकात हो तो वे उन्हें चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता के महत्व के बारे में अवश्य बताएं।

उन्होंने कहा, "2014 में मुझे सेवानिवृत्त हुए दो साल हो चुके थे। मैं एक व्याख्यान के लिए बांग्लादेश जा रहा था। तब भारत में बांग्लादेश के तत्कालीन उच्चायुक्त ने मुझसे कहा कि यदि आपकी शेख हसीना से मुलाकात हो तो उन्हें चुनाव आयोग के महत्व और उसकी विश्वसनीयता के बारे में जरूर बताइए। यह एक महत्वपूर्ण बात थी।"

कुरैशी ने बताया कि इसके बाद उन्होंने शेख हसीना से शिष्टाचार मुलाकात का समय मांगा, जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया। वह उस समय बांग्लादेश में भारत के तत्कालीन उच्चायुक्त पंकज सरन के साथ उनसे मिलने पहुंचे, जबकि शेख हसीना अपने सात वरिष्ठ सलाहकारों के साथ बैठक में मौजूद थीं।

उन्होंने कहा, "मैंने शेख हसीना से शिष्टाचार मुलाकात का समय मांगा और उन्होंने तुरंत मंजूरी दे दी। मैं भारतीय उच्चायुक्त पंकज सरन के साथ गया। वह अपने सात शीर्ष सलाहकारों के साथ आईं, मानो यह कोई औपचारिक शिखर बैठक हो। मैं सिर्फ एक सेवानिवृत्त मुख्य चुनाव आयुक्त था, लेकिन भारत की ऐसी प्रतिष्ठा थी कि एक सेवानिवृत्त सीईसी को भी काफी सम्मान और विश्वसनीयता मिलती है।"

पूर्व सीईसी ने बताया कि यह बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें उन्होंने लोकतंत्र के लिए चुनाव आयोग पर जनता का भरोसा और निष्पक्ष चुनावों की अहमियत पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा, "शेख हसीना शुरुआत में कुछ रक्षात्मक थीं, लेकिन इस विचार के प्रति ग्रहणशील भी थीं। यह बहुत अच्छी बैठक थी। इसके करीब दस साल बाद विवादित चुनाव से ठीक पहले हमारी फिर मुलाकात हुई। उस समय वह कुछ थकी हुई नजर आ रही थीं और उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें संदेह है कि विदेशी शक्तियां उन्हें सत्ता से हटाना चाहती हैं और शासन परिवर्तन की कोशिश कर रही हैं। बाद में वही हुआ।"

कुरैशी की यह टिप्पणी उनकी नई पुस्तक 'इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट ए मेमॉयर' के प्रकाशन के बाद आई है। इस पुस्तक में उन्होंने शेख हसीना के साथ अपनी मुलाकातों का भी उल्लेख किया है।

पुस्तक में उन्होंने वर्ष 2023 के आखिर में हुई एक और मुलाकात का जिक्र किया है, जब वह बांग्लादेश के आम चुनाव से पहले चुनाव पर्यवेक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में वहां गए थे। उन्होंने लिखा है कि उस दौरान शेख हसीना "स्पष्ट रूप से तनावग्रस्त" दिखाई दे रही थीं।

अपनी पुस्तक में उस बातचीत का उल्लेख करते हुए कुरैशी ने लिखा है कि "शेख हसीना ने खुलकर कहा था कि उन्हें लगता है कि विशेष रूप से अमेरिका सहित कुछ बाहरी शक्तियां बांग्लादेश में शासन परिवर्तन कराने की कोशिश कर रही हैं।"

--आईएएनएस

डीएससी

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