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मेघालय हाई कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, न्यायिक अधिकारियों के बिल में देरी का मामला

मेघालय हाई कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, न्यायिक अधिकारियों के बिल में देरी का मामला
मेघालय हाई कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, न्यायिक अधिकारियों के बिल में देरी का मामला

शिलांग, 13 अगस्त (आईएएनएस)। मेघालय हाई कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के मेडिकल और यात्रा से जुड़े खर्चों के रीइम्बर्समेंट बिलों को मंजूरी देने में हुई लंबी देरी को लेकर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है।

कुछ क्लेम तो लगभग एक दशक से लंबित हैं। कोर्ट ने देरी से भुगतान की जाने वाली रकम पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।

चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की डिवीजन बेंच ने मेघालय हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।

कोर्ट ने पहले कई रीइम्बर्समेंट (खर्च की भरपाई) दावों के लंबे समय से लंबित रहने पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए लॉ और फाइनेंस विभागों के सचिवों को तलब किया था।

दोनों अधिकारी सोमवार को बेंच के सामने पेश हुए। कार्यवाही के दौरान कोर्ट ने पाया कि कम रकम वाले कई बिल भी लंबित पड़े थे। जिन दावों का जिक्र किया गया, उनमें अक्टूबर 2014 से ई-प्रपोजल सिस्टम में लंबित 57,680 रुपए का एक बिल शामिल था, जिसके लिए अब तक कोई मंजूरी आदेश जारी नहीं किया गया था।

खबरों के अनुसार, 15,860 रुपए का एक और दावा 2017 से लॉ डिपार्टमेंट के पास लंबित था, जबकि 22,126 रुपए का भुगतान जून 2018 से नहीं हुआ था।

कोर्ट ने कहा, "कुछ रकम तो बहुत ही मामूली और छोटी है, फिर भी उनका भुगतान अब तक नहीं किया गया है।" कोर्ट ने इतनी लंबी देरी के कारणों पर चिंता जताई।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल ए. कुमार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि हाई कोर्ट द्वारा भेजे गए सभी प्रस्तावों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा और उन्हें तेजी से प्रोसेस किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि ज्यूडिशियल अधिकारियों के लंबित बिलों का भुगतान दो सप्ताह के भीतर कर दिया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि 2014 से 2022 के बीच के लंबित दावों पर सालाना 9 प्रतिशत ब्याज का भुगतान किया जाए।

ब्याज की गणना बिल जमा करने की तारीख से लेकर भुगतान की तारीख तक की जाएगी।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि 2022 के बाद के सभी लंबित बिलों को दो सप्ताह के भीतर प्रोसेस करके भुगतान किया जाए। बेंच ने लॉ डिपार्टमेंट के कमिश्नर और सेक्रेटरी को देरी की जांच करने और जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

इस बीच, कोर्ट ने हाई कोर्ट के पास जीपीओ की जमीन से जुड़े मामले की समीक्षा की और एडवोकेट जनरल और भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि वे जीपीओ, पीडब्ल्यूडी और अर्बन अफेयर्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक करके इसका समाधान निकालें।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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