मेघालय के बार एसोसिएशनों ने एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग की
गुवाहाटी, 14 अगस्त (आईएएनएस)। मेघालय की कानूनी बिरादरी और राज्य के एडवोकेट जनरल अमित कुमार के बीच विवाद बढ़ गया है। राज्य के दो प्रमुख बार एसोसिएशनों ने अमित कुमार से संबंध खत्म करते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
मेघालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और शिलांग बार एसोसिएशन ने हाल ही में आयोजित संयुक्त असाधारण आम बैठक (ईजीएम) में यह फैसला लिया। बैठक में 400 से अधिक अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया।
यह बैठक मेघालय हाईकोर्ट में एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान अमित कुमार द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों को लेकर बुलाई गई थी। मामला शिलांग में एक अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट और उसे सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने से जुड़ा है।
दोनों बार एसोसिएशनों ने इसके बाद अमित कुमार का नाम अपनी सदस्यता सूची से हटा दिया और प्रस्ताव पारित कर कहा कि उनके सदस्य उन्हें मेघालय के एडवोकेट जनरल के रूप में मान्यता नहीं देंगे। साथ ही, राज्य सरकार से संवैधानिक पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है।
विवाद की तत्काल वजह अमित कुमार द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष कथित तौर पर दिया गया वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बार एसोसिएशन महिला वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराने में पर्याप्त रूप से सफल नहीं रहे हैं।
बार एसोसिएशनों ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इन्हें पूरे कानूनी समुदाय पर व्यापक आरोप के तौर पर देखा जा सकता है।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें हाइन्यूट्रेप नेशनल यूथ फ्रंट (एचएनवाईएफ) के सदस्यों ने कथित तौर पर एक अधिवक्ता को उनके चैंबर से बाहर खींचकर शिलांग में सार्वजनिक रूप से घुमाया था। इस अधिवक्ता पर इससे पहले एक इंटर्न से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे थे।
घटना के बाद दोनों बार एसोसिएशनों ने मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे से संपर्क कर आरोप लगाया था कि अधिवक्ता पर हमले और सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने से रोकने में अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरती गई।
31 जुलाई की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह की पीठ ने टिप्पणी की थी कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद हस्तक्षेप करने में विफल रही प्रतीत होती है।
इसके बाद 3 अगस्त को हाईकोर्ट को बताया गया कि एचएनवाईएफ के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
अमित कुमार की टिप्पणियों को लेकर दोनों बार एसोसिएशनों ने उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा था, लेकिन बताया गया कि उनके जवाब से विवाद का समाधान नहीं हो सका।
इस बीच, हाईकोर्ट ने महिला अधिवक्ताओं और युवा इंटर्न की सुरक्षा और गरिमा से जुड़े मुद्दों पर भी अलग से विचार किया है। इस मामले में राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी पक्षकार बनाया गया है और उनसे इस मुद्दे पर जवाब देने को कहा गया है।
हाईकोर्ट में स्वत: संज्ञान मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी। अब एडवोकेट जनरल अमित कुमार को पद से हटाने की मांग पर फैसला मेघालय सरकार को करना है।
--आईएएनएस
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