आंध्र प्रदेश के दुगराजपट्टनम में 15,000 करोड़ रुपए का शिपयार्ड बनाएगी मझगांव डॉक
अमरावती, 18 सितंबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली नवरत्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) आंध्र प्रदेश के दुगराजपट्टनम में एक आधुनिक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित करेगी। शुक्रवार को इसकी घोषणा की गई।
इस संबंध में शुक्रवार को एमडीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) और नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क-आंध्र प्रदेश (एनएसएचआईपी-एपी) के प्रबंध निदेशक प्रवीण आदित्य के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहे।
आंध्र प्रदेश सरकार दुगराजपट्टनम में एक ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग-कम-पोर्ट क्लस्टर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, शिपबिल्डिंग एवं शिप रिपेयर यार्ड की अनुमानित लागत 29,254 करोड़ रुपए और बंदरगाह की लागत 9,513 करोड़ रुपए आंकी गई है। प्रस्तावित बंदरगाह का विकास केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा।
एमओयू के तहत एमडीएल अगले पांच से सात वर्षों में आवश्यक अनुमतियों और मंजूरियों के अधीन करीब 15,000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बना रही है। इस परियोजना से आंध्र प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 45,000 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित शिपयार्ड की वार्षिक डिजाइन क्षमता 12 लाख ग्रॉस टनेज होगी, जिसे भविष्य में बाजार की जरूरतों के अनुसार और बढ़ाया जा सकेगा। यहां टैंकर, बल्क कैरियर, कंटेनर जहाज, एलएनजी कैरियर और अन्य बड़े विशेष जहाजों का निर्माण किया जाएगा।
यह शिपबिल्डिंग क्लस्टर केंद्र सरकार की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (एसबीडीएस) के तहत विकसित किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी द्वारा संयुक्त रूप से गठित विशेष प्रयोजन संस्था एनएसएचआईपी-एपी ने एमडीएल को इस परियोजना के लिए एंकर शिपयार्ड के रूप में चुना है।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और आंध्र प्रदेश इस यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, "आंध्र प्रदेश अपनी लंबी समुद्री तटरेखा, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम का लाभ उठाकर समुद्री क्षेत्र के विकास को गति देगा।"
नायडू ने कहा कि दुगराजपट्टनम शिपबिल्डिंग क्लस्टर में एमडीएल की भागीदारी आंध्र प्रदेश को एक प्रमुख जहाज निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी और राज्य में निवेश तथा सहायक उद्योगों को आकर्षित करेगी।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना जहाज निर्माण, समुद्री इंजीनियरिंग, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और अन्य संबंधित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार और नए अवसर पैदा करेगी।
एमडीएल के सीएमडी कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दुगराजपट्टनम में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपयार्ड विकसित करने की क्षमता और समुद्री संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि एमडीएल का लक्ष्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों को पूरा करने वाली आधुनिक सुविधा विकसित करना है।
विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (वीपीए) की अध्यक्ष जसमीत सिंह बिंद्रा ने कहा कि वीपीए, एनएसएचआईपी-एपी में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने के नाते, इस शिपबिल्डिंग क्लस्टर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और केंद्र सरकार तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में सहयोग करेगा।
आंध्र प्रदेश के इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं निवेश विभाग के सचिव कोना शशिधर ने कहा कि एमडीएल को एंकर शिपयार्ड के रूप में चुनना राज्य के समुद्री विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके अनुसार यह परियोजना दुगराजपट्टनम में एक बड़ा जहाज निर्माण और सहायक उद्योग इकोसिस्टम विकसित करने की क्षमता रखती है।
आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड परियोजना के समयबद्ध विकास के लिए आवश्यक भूमि, बुनियादी ढांचे और वैधानिक मंजूरियों की सुविधा उपलब्ध कराएगा।
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