महाराष्ट्र : 1 मई से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए 'प्रैक्टिकल मराठी' अभियान शुरू होगा
मुंबई, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर उन लाइसेंसधारी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लाइसेंस तत्काल रद्द करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी, जो मराठी भाषा के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रहे थे।
हालांकि यह नियम अनिवार्य बना रहेगा, लेकिन 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) से 15 अगस्त तक, सभी 59 आरटीओ कार्यालयों में ड्राइवरों का सर्वे करने और उनकी दक्षता की जांच करने के लिए एक 'विशेष परमिट निरीक्षण अभियान' पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने यह घोषणा की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है; 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) से, तत्काल और सख्त कार्रवाई के बजाय, इसे अधिक व्यवस्थित और प्रशिक्षण-केंद्रित तरीके से लागू किया जाएगा।
ड्राइवर यूनियनों द्वारा समय सीमा बढ़ाने की मांगों के बावजूद, राज्य सरकार ने इस अभियान को 1 मई से ही शुरू करने का निर्णय लिया है। हालांकि, मंत्री सरनाइक ने कहा कि इस दौरान, केवल भाषा की बाधा के कारण परमिट रद्द करने जैसी दंडात्मक कार्रवाई के बजाय, नियमों के पालन और प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "मराठी बोलना अनिवार्य है; यह हमारी राजभाषा है। हालांकि इस चरण में हम केवल भाषा के आधार पर किसी का परमिट रद्द नहीं करेंगे, लेकिन यह अभियान जारी रहेगा। हम ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) अपने कार्यालयों के भीतर ही ड्राइवरों को मराठी सिखाने के लिए विशेष स्थान उपलब्ध कराएगा। ड्राइवरों को 'ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों के लिए मराठी' नामक मार्गदर्शिकाएं (गाइडबुक) दी जाएंगी; यह संसाधन मूल रूप से राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2020 में तैयार किया गया था। 1 अगस्त से 15 अगस्त के बीच, आरटीओ समितियां गठित की जाएंगी, जो उन ड्राइवरों का सर्वे करेंगी और उनकी पहचान करेंगी जो अभी भी मराठी में बातचीत करने में असमर्थ हैं।"
उन्होंने इस बात को फिर से दोहराया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन ड्राइवरों की पहचान करना है जो मराठी नहीं बोलते, और उन्हें दंडात्मक रूप से उनकी आजीविका से वंचित करने के बजाय, प्रशिक्षण की ओर निर्देशित करना है।
उन्होंने कहा, "ड्राइवरों का विद्वान होना आवश्यक नहीं है; उन्हें दैनिक बातचीत के लिए 'व्यावहारिक मराठी' की आवश्यकता होती है, ताकि वे किराया, गंतव्य स्थान और सेवा से संबंधित विषयों पर बातचीत कर सकें।"
मंत्री ने बताया कि इस बदलाव को सुगम बनाने के लिए, राज्य सरकार कई प्रकार के संसाधन उपलब्ध करा रही है, जिनमें पुस्तिकाएं (बुकलेट्स) और सार्वजनिक परिवहन के लिए आवश्यक वाक्यांशों पर केंद्रित एक सरल पाठ्यक्रम शामिल है।
उन्होंने आगे बताया कि आरटीओ कार्यालयों के भीतर ही भाषा-प्रशिक्षण के लिए स्थान आवंटित किया जा रहा है। प्रमुख ड्राइवर यूनियनों ने भी इस कार्य में सहयोग करने की सहमति दी है, और वे अपने स्वयं के कार्यालयों अथवा किराए के हॉल में भी प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन करेंगे।
मंत्री सरनाइक ने कहा, "मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के इस आदेश को महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में एक मसौदा संशोधन के जरिए कानूनी रूप दिया जा रहा है। अब मोटर कैब के परमिट और लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना एक अनिवार्य शर्त होगी। यह नीति स्पष्ट रूप से पारंपरिक वाहनों और ऐप, आधारित एग्रीगेटर्स, दोनों पर लागू होगी।"
उन्होंने चेतावनी दी कि आरटीओ के जो अधिकारी भाषा के ज्ञान की जांच किए बिना 'गलत तरीके से' लाइसेंस जारी करेंगे, उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री की इस घोषणा को देखते हुए, गैर-मराठी चालकों के संघों द्वारा 4 मई को बुलाई गई हड़ताल वापस ले ली गई है। मंत्री सरनाइक ने कहा कि हालांकि सरकार समय-सीमा के मामले में कुछ नरमी बरत रही है, लेकिन उसका अंतिम लक्ष्य इस नियम को सख्ती से लागू करना ही है। 15 अगस्त को होने वाले सर्वेक्षण के बाद, आरटीओ उन लोगों के खिलाफ कानून को सख्ती से लागू करने की योजना बना रहा है, जिन्होंने मराठी भाषा में बुनियादी दक्षता हासिल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है।
--आईएएनएस
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