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तकनीकी पढ़ाई कर रहे युवा लौटें मणिपुर, राज्य के विकास में दें योगदान : मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह

तकनीकी पढ़ाई कर रहे युवा लौटें मणिपुर, राज्य के विकास में दें योगदान : मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह
तकनीकी पढ़ाई कर रहे युवा लौटें मणिपुर, राज्य के विकास में दें योगदान : मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह

इंफाल, 24 सितंबर (आईएएनएस)। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार को राज्य से बाहर तकनीकी कोर्स कर रहे छात्रों से कहा कि वे महत्वपूर्ण कौशल और अनुभव हासिल करके वापस लौटें और राज्य के विकास में योगदान दें।

मुख्यमंत्री ने मणिपुर के अल्पसंख्यक, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और एससी (अनुसूचित जाति) समुदायों के उन छात्रों से बातचीत की, जिनका चयन मणिपुर माइनॉरिटीज एंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट सोसाइटी की पहल के तहत आईआईटी मद्रास में सेमीकंडक्टर सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी की स्किल ट्रेनिंग के लिए हुआ है।

यह संवाद कार्यक्रम इंफाल स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया। इसमें आईआईटी मद्रास के अधिकारी और फैकल्टी भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने चयनित छात्रों को शुभकामनाएं दीं और उनसे इस अवसर का पूरा लाभ उठाने तथा ऐसे कौशल सीखने को कहा, जिनसे रोजगार के नए अवसर मिल सकें।

खेमचंद सिंह ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के तकनीकी पहलू भले ही विशेष तरह के हों, लेकिन यह उभरता हुआ क्षेत्र युवाओं के लिए बड़े अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्र आईआईटी मद्रास में मिलने वाली ट्रेनिंग का बेहतर उपयोग करेंगे और महत्वपूर्ण कौशल तथा अनुभव लेकर वापस आएंगे, जिससे वे राज्य के विकास में योगदान दे सकें।

अल्पसंख्यक मामलों, ओबीसी और एससी विभाग के कमिश्नर-कम-सेक्रेटरी आर्मस्ट्रांग पामे ने बताया कि सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सामग्री की असेंबली तथा मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं पर ध्यान दिया जाता है।

आईआईटी मद्रास कार्यक्रम को स्किल डेवलपमेंट पहल के रूप में चला रहा है। इसके तहत संस्थान की विशेष सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए व्यावहारिक और उद्योग की जरूरतों के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है।

खास बात यह है कि 75 आवेदनों में से चयन प्रक्रिया के बाद 25 ग्रेजुएट छात्रों का चयन किया गया है। इनमें 22 लड़के और तीन लड़कियां शामिल हैं। छात्र चाहे किसी भी विषय से ग्रेजुएट हों, उन्हें आईआईटी मद्रास में 15 दिनों की आवासीय ट्रेनिंग दी जाएगी।

ट्रेनिंग, रहने और आने-जाने का खर्च राज्य सरकार उठाएगी, जिसमें आईआईटी मद्रास मदद करेगा।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के साथ उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आईआईटी मद्रास सफल प्रशिक्षुओं को उससे जुड़े विभिन्न उद्योगों में नौकरी दिलाने में सहायता करेगा। शुरुआती स्तर पर उन्हें 20,000 से 25,000 रुपए प्रति माह वेतन मिलने की उम्मीद है।

इस संवाद कार्यक्रम में आईआईटी मद्रास के निदेशक पद्मश्री प्रो. वी कामकोटि, प्रो. आर सारथी और अन्य फैकल्टी तथा अधिकारियों ने भी वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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