मालवीय नगर होटल आग: दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी लवकेश बजाज को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी
नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को मालवीय नगर होटल अग्निकांड के आरोपी होटल मालिक लवकेश बजाज को मेडिकल आधार पर चार हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी।
जस्टिस सचिन दत्ता की सिंगल-जज बेंच ने बजाज की अंतरिम जमानत याचिका को मंजूरी दी। कोर्ट ने पाया कि हाल ही में उनके पेट की बड़ी सर्जरी हुई थी और जटिलताओं का जोखिम है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक मेडिकल देखभाल की जरूरत है।
अपने आदेश में हाई कोर्ट ने नोट किया कि बजाज को 15 सितंबर को ही अस्पताल से छुट्टी मिली थी। कोर्ट ने कहा कि आवेदक की सर्जरी की प्रकृति और अस्पताल से छुट्टी के बाद बीते कम समय को देखते हुए, उन्हें ठीक होने और पूरी तरह से रिकवर होने के लिए अंतरिम जमानत मिलनी चाहिए।
जस्टिस दत्ता ने साफ किया कि यह आदेश केवल मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला करने के लिए दिया गया है। इसका ट्रायल की कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही इसे मामले की मेरिट पर कोई राय माना जाएगा।
बजाज को रिहाई की तारीख से चार हफ्ते के लिए अंतरिम जमानत दी गई है। इसके लिए उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार 25,000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की एक जमानत देनी होगी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बजाज को राष्ट्रीय राजधानी की सीमा के भीतर रहने और पूर्व अनुमति के बिना शहर छोड़ने का निर्देश दिया। उन्हें जेल अधिकारियों और जांच अधिकारी को अपना आवासीय पता और मोबाइल नंबर भी देना होगा, साथ ही अपने फोन पर लोकेशन सेवा चालू रखनी होगी। न्यायालय ने उन्हें शिकायतकर्ता, मृतक के परिवार के सदस्यों या किसी भी गवाह से संपर्क करने से भी मना किया और निर्देश दिया कि अंतरिम जमानत का उपयोग केवल चिकित्सा उपचार और स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाए।
अंतरिम जमानत अवधि समाप्त होने पर उन्हें संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
केंद्रीय जेल अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार, आंतों में रुकावट और मधुमेह के निदान के बाद 31 अगस्त को बजाज की एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी की गई थी, जिसमें पेरिटोनियल लैवेज, संकुचित इलियल सेगमेंट का रिसेक्शन और एनास्टोमोसिस, साथ ही पेल्विक ड्रेन प्लेसमेंट शामिल था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रक्रिया के बाद उन्हें सर्जिकल साइट संक्रमण हो गया और ऑपरेशन के सातवें दिन उनके पेट के निचले मध्य भाग का घाव खुला छोड़ दिया गया। रिपोर्ट में आगे बताया गया कि घाव की नियमित रूप से ड्रेसिंग की जा रही थी और शल्यक्रिया स्थल पर दबाव पड़ने तथा घाव के खुलने का खतरा था।
रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि बजाज को जेल के औषधालय में एंटीबायोटिक्स, मौखिक हाइपोग्लाइसेमिक दवा और सहायक दवाएं दी जा रही थीं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह पारित एक आदेश में बजाज के वकील की इस आशंका के बाद एक नई चिकित्सा रिपोर्ट मांगी थी कि जेल में उनके ताजा और खुले घाव की उचित देखभाल नहीं की जा सकेगी। न्यायालय ने शुरू में आरएमएल अस्पताल की उस रिपोर्ट पर ध्यान दिया था जिसमें कहा गया था कि बजाज को 15 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी और उन्हें केवल साधारण ड्रेसिंग की आवश्यकता थी जिसे जेल अस्पताल में किया जा सकता था।
--आईएएनएस
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