चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में 5 एमएलसी सीटों पर चुनाव का किया ऐलान, महायुति की सभी सीटों पर नजर
मुंबई, 22 सितंबर (आईएएनएस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) की पांच अहम सीटों के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान किया।
इस चुनाव में तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (औरंगाबाद, पुणे और नागपुर) और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (अमरावती और पुणे) शामिल हैं, जहां मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है।
ईसीआई (चुनाव आयोग) के जारी आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, नोटिफिकेशन 29 सितंबर को जारी किया जाएगा, नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है जबकि नामांकन की जांच 7 अक्टूबर तक पूरी हो जाएगी। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगा और वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मौजूदा प्रतिनिधियों में औरंगाबाद डिवीजन से भानुदासराव सतीश चव्हाण (एनसीपी), पुणे डिवीजन से अरुण गणपति लाड (एनसीपी एसपी) और नागपुर डिवीजन से अभिजीत गोविंदराव वंजारी (कांग्रेस) शामिल हैं। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अमरावती डिवीजन से किरण रामराव सरनाइक (निर्दलीय लेकिन आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में सहयोगी सदस्य के रूप में शामिल) और पुणे डिवीजन से जयंत दिनकर आसगांवकर (कांग्रेस) सदस्य हैं।
चुनाव की घोषणा ने महायुति गठबंधन के भीतर चर्चा शुरू कर दी है क्योंकि गठबंधन के सभी घटक दल पढ़े-लिखे और प्रभावशाली वोटर्स के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए उत्सुक हैं।
भाजपा स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों को अपना पारंपरिक वोट बैंक मानती है क्योंकि उसने ऐतिहासिक रूप से पुणे और नागपुर जैसी सीटों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से किया है। पार्टी के रणनीतिकार पिछले चुनावों में हारने के बाद इन सीटों को फिर से हासिल करने के लिए उत्सुक हैं। अजीत पवार की एनसीपी का जमीनी स्तर पर मजबूत आधार है, खासकर पुणे डिवीजन में जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना पश्चिमी महाराष्ट्र और अमरावती में शिक्षकों, प्रोफेसरों और युवा नेटवर्क के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने में सक्रिय रही है।
शिंदे की पार्टी के प्रमुख संगठनात्मक नेताओं ने क्षेत्रीय दौरे किए हैं और विभिन्न शिक्षक संघों का समर्थन हासिल किया है, जिससे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिवसेना के उम्मीदवारों के लिए एक मजबूत स्थिति बनी है। महायुति नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया कि सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला आसानी से तय कर लिया जाएगा। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि उनका मुख्य मकसद वोटों के बंटवारे को रोकना और अपनी संयुक्त संगठनात्मक ताकत का फायदा उठाकर बड़ी जीत हासिल करना है।
महायुति गठबंधन के एक सूत्र ने कहा, "हमारा ध्यान एकजुटता दिखाने पर है। गठबंधन में शामिल हर पार्टी का शिक्षकों, पेशेवरों और ग्रेजुएट लोगों के बीच अपना अलग संगठनात्मक फायदा है। एक संयुक्त रणनीति से सभी पांच सीटों पर निर्णायक जीत पक्की होगी।"
23 अक्टूबर को होने वाले मतदान को देखते हुए, 29 सितंबर से नामांकन शुरू होने से पहले गठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच सीटों के बंटवारे पर बातचीत तेज होने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, विपक्ष में शामिल शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस जल्द ही अपनी चुनावी रणनीति तय करने के लिए बैठक करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों पार्टियों के 'महा विकास अघाड़ी' गठबंधन के तौर पर मिलकर चुनाव लड़ने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
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