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पेपर लीक का केंद्र बन गया है महाराष्ट्र : शिवसेना (यूबीटी)

पेपर लीक का केंद्र बन गया है महाराष्ट्र : शिवसेना (यूबीटी)
पेपर लीक का केंद्र बन गया है महाराष्ट्र : शिवसेना (यूबीटी)

मुंबई, 29 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार को भिवंडी में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सड़ चुकी है और इतने जघन्य अपराधों के बावजूद किसी को भी कोई सजा नहीं मिलती। यही कारण है कि प्रश्नपत्र लीक का धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार को अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में महाराष्ट्र सरकार पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला।

संपादकीय में कहा गया, "बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य कभी सामूहिक नकल और सरकार प्रायोजित नकल के लिए बदनाम थे। महाराष्ट्र उनसे भी एक कदम आगे निकल गया है। यहां अब सरकार प्रायोजित 'पेपर लीक' का नया कारोबार पूरे जोर-शोर से चल रहा है। जो लोग राम मंदिर के दानपात्र तक लूट सकते हैं, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है?"

पार्टी ने अपने मुखपत्र में प्रकाशित तीखे संपादकीय में दावा किया कि आज देश में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का सबसे बड़ा केंद्र महाराष्ट्र बन चुका है। संपादकीय में कहा गया कि गृह मंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस को इस विनाशकारी स्थिति की कोई चिंता नहीं दिखती। पिछले महीने हुए नीट पेपर लीक की जड़ें महाराष्ट्र तक पहुंची थीं और अब टीईटी का प्रश्नपत्र भी लीक हो गया है। यह महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था का सार्वजनिक अपमान है।

संपादकीय में कहा गया, "यह कोई अकेली घटना नहीं बल्कि सत्तारूढ़ महायुति सरकार की विफलता और भ्रष्टाचार का काला इतिहास है। यह भ्रष्टाचार से पैदा हुई ऐसी भयावह व्यवस्था है, जिसने युवाओं के भविष्य के साथ खुला विश्वासघात किया है। महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाली ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। जिस राज्य ने भारत में शिक्षा और सामाजिक सुधार की नींव रखी थी, वही आज अपने निरंतर पतन का गवाह बनने को मजबूर है। ऐसा लगता है मानो प्रगतिशील महाराष्ट्र को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है।"

संपादकीय में आगे कहा गया कि आज की राजनीति में पेपर लीक उतना ही सामान्य हो गया है, जितना विधायक और सांसदों का दल-बदल। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा, "दल बदलने वाले विधायकों को कथित तौर पर 50-50 करोड़ रुपये मिलते हैं, जबकि पेपर लीक लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर देता है। ऐसी गंभीर स्थिति में महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री को एक दिन भी अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।"

संपादकीय में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गृह मंत्री के रूप में भी पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। इसमें कहा गया, "गृह विभाग का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और भाजपा के हितों के लिए किया जा रहा है। महाराष्ट्र को एक पूर्णकालिक गृह मंत्री की सख्त जरूरत है। यदि फडणवीस इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर सकते, तो उन्हें स्वयं पद छोड़ देना चाहिए। हालांकि यह भी सवाल है कि क्या महाराष्ट्र के सत्ताधारियों में अब राजनीतिक नैतिकता बची है?"

संपादकीय के अनुसार, राज्य की आधी पुलिस फोर्स इस समय दल बदलने वाले विधायकों और सांसदों की सुरक्षा में लगी हुई है। इसमें कहा गया, "गृह मंत्री को परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक दल-बदलुओं की सुरक्षा की चिंता है। प्रशासन ने छात्रों को इतना असहाय और कमजोर बना दिया है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो उन्हें आसानी से कुचला और नजरअंदाज किया जा सकता है। इसलिए जब टीईटी का पेपर लीक होता है और परीक्षा रद्द कर दी जाती है, तब अभ्यर्थी सिर्फ निराशा में आह भरने के अलावा कुछ नहीं कर सकते।"

ठाकरे गुट ने कहा कि टीईटी कोई साधारण परीक्षा नहीं, बल्कि योग्य शिक्षक बनने की बुनियादी सीढ़ी है। लेकिन जिस चयन प्रक्रिया से भविष्य के शिक्षकों का चयन होना है, वही घोटालों और अनियमितताओं से ग्रस्त हो चुकी है। यह इस बात का चौंकाने वाला प्रमाण है कि महाराष्ट्र का भविष्य किस तरह संगठित माफियाओं के हाथों में चला गया है।

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि "यह पेपर लीक माफिया, बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों का एक मजबूत और संगठित गिरोह है।"

पार्टी ने कहा, "परीक्षा से महज 24 घंटे पहले प्रश्नपत्र लीक होकर सोशल मीडिया पर खुलेआम नहीं फैल सकते, जब तक कि उन्हें सत्ता का मजबूत संरक्षण न मिला हो। नीट पेपर लीक की कड़ियां भाजपा से जुड़ी हैं और टीईटी पेपर लीक के जिम्मेदार लोग भी उसी राजनीतिक तंत्र का हिस्सा हैं। सरकार अब सिर्फ 'जांच' के नाम पर समय बिता रही है।"

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि नीट पेपर लीक गिरोह पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, लातूर और नासिक तक सक्रिय था, जबकि अब टीईटी घोटाले का केंद्र भिवंडी बन गया है।

पार्टी ने सवाल किया, "क्या गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस बता सकते हैं कि पेपर लीक के मामले बार-बार महाराष्ट्र में ही क्यों सामने आ रहे हैं?"

संपादकीय में कहा गया, "यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि युवाओं के सपनों, उम्मीदों और आकांक्षाओं को लूटने की एक सुनियोजित साजिश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्राओं के दौरान युवाओं को नए सपने दिखाते हैं जबकि यहां की राजनीतिक व्यवस्था शिक्षा की पवित्रता की रक्षा करने के बजाय राजनीतिक जोड़-तोड़ में अधिक व्यस्त है।"

संपादकीय में दावा किया गया कि महाराष्ट्र की पूरी शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है। इसमें कहा गया, "इतने बड़े अपराधों के बावजूद जवाबदेही तय नहीं होती, इसलिए पेपर लीक का अवैध कारोबार बिना किसी डर के चलता रहता है।"

अंत में संपादकीय में कहा गया, "दुर्भाग्य से महाराष्ट्र उन राज्यों से भी आगे निकल गया है, जो कभी सामूहिक नकल के लिए बदनाम थे। यहां संस्थागत स्तर पर पेपर लीक का संकट खड़ा हो चुका है। जब सत्ता में बैठे लोग संस्थाओं की बुनियादी विश्वसनीयता की रक्षा नहीं कर पाते, तो इसकी सबसे बड़ी कीमत युवाओं को चुकानी पड़ती है।"

--आईएएनएस

पीएम

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