महाराष्ट्र में शुरू होगी महा-आईडी व्यवस्था, घर बैठे मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ
मुंबई, 14 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार अब राज्य के हर नागरिक को एक डिजिटल पहचान देगी। इसके लिए सरकार 'महा-आईडी' जारी करेगी। इसका मकसद सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तेज, पारदर्शी और घर बैठे सरकारी सेवाएं देना है।
यह कोई अलग पहचान पत्र नहीं होगा। 'महा-आईडी' सीधे व्यक्ति के आधार कार्ड से जुड़ी एकीकृत पहचान संख्या होगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे एआई और आईटी समाधान अपनाएं, ताकि नागरिकों को सरकारी सेवाएं सीधे घर से मिल सकें। इसी डिजिटल गवर्नेंस पहल का अहम हिस्सा 'महा-आईडी' होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, "इस प्लेटफॉर्म को इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के अंतर्गत 'महा-सारथी' पोर्टल के जरिए चलाया जाएगा। नागरिक तय पोर्टल पर रजिस्टर करेंगे और जरूरी जानकारी देंगे। आधार फ्रेमवर्क को शामिल करते हुए डिजिटल महा-आईडी तैयार की जाएगी। नागरिक इसी एक आईडी से विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे।"
'महा-आईडी' देने के बाद नागरिकों को योजनाओं, जानकारी, सब्सिडी और सेवाओं तक पहुंचने के लिए सिर्फ 'महा-आईडी' बतानी होगी। सरकार के पास पहले से ही डोमिसाइल सर्टिफिकेट, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड जैसे अहम रिकॉर्ड मौजूद हैं। इसलिए हर आवेदन के साथ नागरिकों को भौतिक दस्तावेज बार-बार जमा नहीं करने होंगे।
मुख्यमंत्री फडणवीस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस पहल की रूपरेखा पेश कर सकते हैं। इसके तुरंत बाद आधिकारिक परियोजना लॉन्च होगी।
यह एकीकृत प्रणाली छात्रों, किसानों, वरिष्ठ नागरिकों, महिला उद्यमियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सीधे लाभ देगी। अभी छात्रों को राज्य छात्रवृत्ति के लिए शिक्षा पोर्टलों पर अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। किसानों को सब्सिडी के लिए बार-बार पहचान, जमीन और बैंक का ब्योरा देना होता है। इसी तरह सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों को भी ऐसे प्रमाण पत्र दोबारा जमा करने पड़ते हैं जो पहले से अन्य विभागों के रिकॉर्ड में होते हैं।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि पहले से सत्यापित डेटा अब पात्र सेवाओं में अपने आप इस्तेमाल हो जाएगा। इससे अनावश्यक दस्तावेज जमा करने से छुटकारा मिलेगा।
'महा-आईडी' और 'महा-सारथी' पोर्टल के एकीकरण से विभिन्न सरकारी विभाग और डिजिटल प्लेटफॉर्म आपस में जुड़ जाएंगे। इससे एक अत्यधिक इंटरऑपरेबल डिजिटल गवर्नेंस नेटवर्क बनेगा। जब राज्य के विभाग अपना डेटा सिंक्रोनाइज करेंगे, तो एक विभाग को चाहिए जानकारी दूसरे विभाग से अपने आप मिल जाएगी। इससे विभागों के बीच की रुकावटें खत्म होंगी।
इस पहल से नागरिकों को कई अकाउंट बनाने, अलग-अलग यूजरनेम-पासवर्ड याद रखने और बार-बार पहचान सत्यापन की झंझट से मुक्ति मिलेगी।
--आईएएनएस
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