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मद्रास हाई कोर्ट से छह पूर्व विधायकों के खिलाफ पीआईएल खारिज, याचिकाकर्ता वकील पर एक लाख रुपए का जुर्माना

मद्रास हाई कोर्ट से छह पूर्व विधायकों के खिलाफ पीआईएल खारिज, याचिकाकर्ता वकील पर एक लाख रुपए का जुर्माना
मद्रास हाई कोर्ट से छह पूर्व विधायकों के खिलाफ पीआईएल खारिज, याचिकाकर्ता वकील पर एक लाख रुपए का जुर्माना

चेन्नई, 29 सितंबर (आईएएनएस)। मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को चेन्नई के एक वकील पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया। वकील ने मांग की थी कि तमिलनाडु के छह पूर्व विधायकों से उनके इस्तीफे के कारण हुए उपचुनाव का खर्च वसूला जाए और उन्हें मौजूदा विधानसभा कार्यकाल के दौरान दोबारा चुनाव लड़ने से रोका जाए।

चीफ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने वकील एस. काशी रामलिंगम द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया।

बेंच ने कहा कि याचिका पब्लिसिटी पाने के लिए दायर की गई लगती है और यह भी बताया कि कोर्ट ने पिछले हफ्ते ऐसी ही एक याचिका खारिज कर दी थी।

वकील के. सुथन की याचिका पर 24 सितंबर को दिए गए फैसले में बेंच ने कहा था कि कानून उन विधायकों पर कोई वित्तीय देनदारी या चुनावी रोक नहीं लगाता है जो इस्तीफा देते हैं और फिर उपचुनाव के जरिए विधानसभा में लौटना चाहते हैं।

इससे पहले की याचिका में कोर्ट से यह मांग की गई थी कि वह भारत के चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वह संबंधित विधायकों से उपचुनाव का खर्च वसूले और उन्हें पांच साल तक चुनाव लड़ने से रोके।

कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के पास इनमें से कोई भी कदम उठाने का कानूनी अधिकार नहीं है और कोर्ट उसे ऐसी शक्तियां नहीं दे सकता जो उसके पास नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर विधायकों को अपनी राजनीतिक निष्ठा बदलने के लिए इस्तीफा देने और तुरंत उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने से रोकना है, तो इसके लिए संसद को कानून बनाना होगा।

अदालत ने नए चुनाव कराने में होने वाले सरकारी खर्च को लेकर जताई गई चिंताओं को माना, लेकिन कहा कि इन चिंताओं के आधार पर कोर्ट के आदेश से लगाई गई पाबंदियों को सही नहीं ठहराया जा सकता।

24 सितंबर के फैसले में कहा गया, "विधायी सीट से इस्तीफा देने का अधिकार खुद ही सदन की सदस्यता से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था का एक हिस्सा है, और इसे न्यायिक आदेश के जरिए कानून से अलग अतिरिक्त शर्तों के बोझ तले नहीं दबाया जा सकता।"

अदालत ने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को अयोग्यता के लिए नए आधार जोड़ने की शक्ति नहीं देता है। इसलिए, अदालत आयोग को ऐसी शक्ति का इस्तेमाल करने का निर्देश नहीं दे सकती जो कानून ने उसे नहीं दी है।

रामलिंगम की याचिका में विरालिमलाई के सी. विजयभास्कर, करूर के एमआर विजयभास्कर, अंबा समुद्रम के एसक्की सुबैया, धारापुरम की पी. सत्यभामा, मदुरंतकम की के. मरगथम कुमारवेल और पेरुंदुरई के एस. जयकुमार के नाम शामिल थे। इन सभी छह लोगों ने अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे दिया था।

बेंच ने पाया कि उनकी याचिका में उठाए गए मुद्दे पहले ही सुथन के मामले में तय किए जा चुके थे, इसलिए बेंच ने याचिका खारिज कर दी और उन्हें एक लाख रुपए का खर्च भरने का आदेश दिया।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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