राज्यपाल के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष सतीशन का तंज, 'आर्थिक बदहाली और सरकार की विफलता उजागर'
तिरुवनंतपुरम, 20 जनवरी (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में राज्यपाल राजेंद्र वी अर्लेकर के नीति भाषण के बाद नेता प्रतिपक्ष वी.डी. सतीशन ने पिनराई विजयन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नीति वक्तव्य को “झूठे दावों और अधूरे सत्यों से भरा दस्तावेज” करार देते हुए कहा कि यह सरकार की विफलता और गंभीर वित्तीय संकट को उजागर करता है।
सतीशन ने कहा कि 112 मिनट के लंबे भाषण में राज्य की आर्थिक बदहाली साफ झलकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केंद्र से मिलने वाले कथित 53,000 करोड़ रुपये का दावा न तो नीति भाषण में किया और न ही सुप्रीम कोर्ट में दाखिल दस्तावेज़ों में इसका जिक्र है।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक सुविधा के अनुसार अब अलग-अलग आंकड़े पेश किए जा रहे हैं।”
धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के सरकार के दावे पर सवाल उठाते हुए सतीशन ने मत्स्य मंत्री साजी चेरियन के कथित सांप्रदायिक बयानों का हवाला दिया और कहा कि ऐसे मंत्री को मंत्रिमंडल में बनाए रखना सरकार के नैतिक दावों को खोखला करता है।
अत्यंत गरीबी समाप्त होने के सरकार के दावे को उन्होंने “गरीबों के साथ क्रूर अन्याय” बताया। सतीशन ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में अब भी ऐसे लोगों की स्थिति सामने आ रही है, जिनके पास भोजन और आश्रय तक नहीं है। उन्होंने बताया कि करीब छह लाख परिवार अब भी अत्यंत गरीबों की सूची में हैं, जबकि सरकार सीमित सहायता को सफलता के रूप में पेश कर रही है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमला करते हुए सतीशन ने कहा कि यह “वेंटिलेटर पर” है। उन्होंने अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस, पीलिया और चिकनपॉक्स जैसी संक्रामक बीमारियों के बढ़ते मामलों का जिक्र किया। उनके मुताबिक, वर्ष 2026 में ही 1.2 लाख से अधिक लोग बुखार के इलाज के लिए सामने आए हैं। साथ ही, ओमन चांडी सरकार के दौरान शुरू की गई करुण्य स्वास्थ्य योजना के तहत 1,200 करोड़ रुपये का बकाया अब भी लंबित है।
उच्च शिक्षा के दावों को खारिज करते हुए सतीशन ने कहा कि कई विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्राचार्य पद खाली हैं, चार वर्षीय पाठ्यक्रम व्यवस्था चरमरा चुकी है और बड़ी संख्या में छात्र राज्य से बाहर पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई है।
अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण के दावों को भी उन्होंने भ्रामक बताया। सतीशन ने कहा कि राज्य के इतिहास में पहली बार योजना मद में ठहराव आया है, एससी फंड से 500 करोड़ रुपये और एसटी फंड से 112 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। ई-ग्रांट में देरी के कारण कई छात्रों को पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है।
कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि अपराध, ड्रग माफिया और संगठित आपराधिक नेटवर्क के चलते स्थिति बिगड़ती जा रही है। इसके अलावा, बढ़ते वन्यजीव हमलों, कृषि संकट, रबर मूल्य पर अधूरे वादे, तटीय क्षेत्रों, इडुक्की और वायनाड के लिए क्षेत्रीय पैकेजों के ठप होने और पेंशन वृद्धि में देरी का भी उन्होंने उल्लेख किया।
राज्यपाल विवाद पर सतीशन ने कहा कि संविधान के अनुसार राज्यपाल को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित अभिभाषण पढ़ना होता है, लेकिन स्वयं यह अभिभाषण ही विश्वसनीयता से रहित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव केवल संकट के समय सामने आता है और बाद में चुपचाप सुलझा लिया जाता है, जिससे जनता का भरोसा कमजोर होता है।
--आईएएनएस
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