लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जनगणना 2027 के लिए स्व-गणना में हिस्सा लिया
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शुक्रवार को अपने दिल्ली आवास पर जनगणना 2027 की स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने नागरिकों से अपने घर का विवरण ऑनलाइन जमा करने के साथ-साथ एक मजबूत और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में ओम बिरला ने लिखा, "भारत की जनगणना-2027 के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है। आज दिल्ली स्थित आवास पर मैंने अपना स्व-गणना पंजीकरण पूरा किया।"
उन्होंने कहा कि निश्चय ही यह राष्ट्रीय जनगणना एक नए युग की शुरुआत है। पहली बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित हो रही है, जिससे प्रत्येक नागरिक को अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने का अधिकार और सुविधा भी मिली है। यह अत्यंत सुरक्षित, सटीक और सुविधाजनक प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा, "देश के विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्व-गणना अवधि अलग-अलग है। इसके आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने क्षेत्र अनुसार आप स्वयं अपना स्व-गणना कर सकते हैं।"
उन्होंने आगे लिखा, "मैं देशवासियों से आग्रह करता हूं कि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं, स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करें, अपने परिचितों को भी प्रेरित करें और 'जनगणना से जनकल्याण' के ध्येय में सहयोगी होकर सशक्त-समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दें।"
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को अपनी स्व-गणना पूरी की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिल्ली में जनगणना 2027 की स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "जनगणना 2027 के हिस्से के तौर पर मैंने स्व-गणना प्रक्रिया में हिस्सा लिया। जनगणना 2027 का पहला चरण, जिसमें मकानों की सूची बनाना और आवास संबंधी कार्य शामिल हैं, पहले ही शुरू हो चुका है। पहली बार डिजिटल डेटा संग्रह पर जोर दिया गया है, जिससे लोग अपने घर-परिवार से जुड़ी जानकारी की स्व-गणना खुद कर सकेंगे। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लें और अपनी स्व-गणना पूरी करें, ताकि ‘विकसित भारत’ की एक मजबूत नींव रखने में मदद मिल सके।"
जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होने जा रही है, जो 150 से भी ज्यादा सालों से चली आ रही कागज-आधारित पारंपरिक प्रणाली से अलग होगी।
यह प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण को 'हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना' (एचएलओ) के नाम से जाना जाता है। इसमें घरों की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और संपत्ति से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने पर खास ध्यान दिया जाता है। इस चरण में नागरिकों को 33 तय सवालों के जवाब देने होंगे।
--आईएएनएस
पीएसके

