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लोकसभा से अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के तौर पर वैधानिक दर्जा देने वाला बिल पास

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी के रूप में वैधानिक मान्यता देने वाला विधेयक पारित किया।
लोकसभा से अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के तौर पर वैधानिक दर्जा देने वाला बिल पास

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी के रूप में वैधानिक मान्यता देने वाला विधेयक पारित किया।

दो घंटे लंबी बहस के बाद 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026' ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने विधेयक का समर्थन किया।

समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि अगर विशाखापत्तनम को राज्य की राजधानी के तौर पर विकसित किया जाता, तो किसानों की जमीन के अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ती और इससे बड़ी मात्रा में पैसे की भी बचत होती।

इस बीच, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सदस्यों ने बहस के दौरान बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध करते हुए सदन से वॉक-आउट कर दिया।

इस बिल का मकसद 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014' में संशोधन करना है, ताकि अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के तौर पर स्थापित किया जा सके।

आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 5 में प्रस्तावित संशोधन के तहत, पहले के प्रावधान 'एक नई राजधानी' को बदलकर 'अमरावती नई राजधानी होगी' कर दिया गया है। इस तरह अमरावती को वैधानिक ढांचे के भीतर मजबूती से स्थापित कर दिया गया है।

यह विधायी कदम 28 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव के बाद उठाया गया है, जिससे संसद में इस बिल को पेश करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

संशोधन बिल की व्याख्या के अनुसार, "अमरावती" शब्द में वे सभी राजधानी शहर क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2014 के प्रावधानों के तहत अधिसूचित किया गया है।

टीडीपी, भाजपा और जन सेना के सदस्यों ने इस बिल का जोरदार समर्थन किया। ये आंध्र प्रदेश में एनडीए सरकार के सहयोगी दल हैं।

ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी, टीडीपी सांसद अप्पलनायडू, भाजपा सांसद सीएम रमेश और दग्गुबाती पुरंदेश्वरी, तथा जन सेना सांसद वल्लभनेनी बालाशौरी ने अमरावती को राजधानी बनाए जाने के समर्थन में अपनी बात रखी।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), शिवसेना (एकनाथ शिंदे), और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने इस बिल का समर्थन किया।

भाजपा सदस्य दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने कहा कि अमरावती के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए, इसे राज्य की राजधानी के तौर पर चुना गया था। जहां तेलंगाना ने हैदराबाद को अपनी राजधानी बनाकर अपनी यात्रा शुरू की थी। वहीं, आंध्र प्रदेश के पास कोई राजधानी नहीं थी।

उन्होंने कहा कि 8 फरवरी, 2014 का दिन भारत के संसदीय इतिहास में एक काला दिन था, क्योंकि एक राज्य को दो हिस्सों में बांटने वाला बिल बिना किसी सही बहस के, संसद के दरवाजे बंद करके और कैमरे बंद करके पास कर दिया गया था।

उन्होंने दावा किया कि राज्य को दो हिस्सों में बांटने का यह फैसला उस समय की यूपीए सरकार ने सिर्फ और सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए लिया था। शायद भारत के इतिहास में यह पहला ऐसा मामला था, जहां एक बचे हुए राज्य के पास अपनी कोई राजधानी ही नहीं थी।

उन्होंने राजधानी के लिए किसानों द्वारा दी गई जमीन का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास में अमरावती को लोगों की पहली ऐसी राजधानी के तौर पर याद किया जाएगा, जिसे जबरदस्ती से नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे से बनाया गया था।

2019 से 2024 के बीच राज्य में राजधानी को लेकर बहुत ज्‍यादा अनिश्चितता का माहौल रहा। उन्होंने उस समय की वाईएसआरसीपी सरकार द्वारा कई राजधानियां बनाने के फैसले को बिना सोचे-समझे और बेवकूफी भरा फैसला बताया।

वहीं, तेलंगाना से कांग्रेस पार्टी के सदस्य आर. रघुराम रेड्डी ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत तेलंगाना से किए गए उन वादों को पूरा न किए जाने से जुड़े मुद्दे उठाए।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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