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लेग वॉर्मर्स, अजीब हेयरस्टाइल और तेज आवाज में बजता रेडियो… लिसा रे को याद आया 80 का दशक

लेग वॉर्मर्स, अजीब हेयरस्टाइल और तेज आवाज में बजता रेडियो… लिसा रे को याद आया 80 का दशक
लेग वॉर्मर्स, अजीब हेयरस्टाइल और तेज आवाज में बजता रेडियो… लिसा रे को याद आया 80 का दशक

मुंबई, 8 सितंबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री लिसा रे ने 1980 के दशक की अपनी यादों को ताजा करते हुए उस दौर के संगीत, फैशन और बेफिक्र जिंदगी से जुड़े कई किस्से साझा किए हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए बताया कि 80 का दशक उनके लिए सिर्फ फैशन और संगीत का दौर नहीं था, बल्कि उनकी जिंदगी का वह हिस्सा था, जिसमें गर्मियों की छुट्टियां, दोस्तों के साथ साइकिल चलाना, रेडियो पर तेज आवाज में गाने सुनना और थोड़ी-सी बगावत सब कुछ शामिल था।

लिसा ने इंस्टाग्रम पर अपनी एक तस्वीर साझा की है, उसमें वह ब्लैक कलर की आउटफिट में नजर आ रही हैं। तस्वीर में उनके घुंघराले बाल खुले हुए दिखाई दे रहे हैं। उनका पूरा लुक 80 के दशक की याद दिलाता है। तस्वीर के साथ लिसा ने कैप्शन में लिखा, ''मैं सच में 80 के दशक के उस दौर से गुजरी हूं। उस समय के फैशन के मुताबिक, मैंने कैंडी कलर के लेग वॉर्मर्स, अजीबोगरीब हेयरस्टाइल और फिल्म 'फ्लैशडांस' से प्रभावित स्वेटशर्ट स्टाइल किया है।''

लिसा ने उस दौर के संगीत को भी अपनी यादों का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने आगे लिखा, ''मैडोना, माइकल जैक्सन और माइकल हचेंस... ये कलाकार मेरी जवानी की यादों से जुड़े हुए हैं। मैं ड्यूरन की इतनी बड़ी फैन थीं कि मैंने अपने पालतू जानवरों के नाम तक इस म्यूजिकल ग्रुप से प्रभावित होकर रखे थे।''

लिसा ने अपने बचपन और जवानी के दिनों से जुड़ी जगहों को भी याद किया। उन्होंने लिखा, ''कलकत्ता की गर्मियों और टोरंटो में लंबे वीकेंड के दौरान मैं अपने आसपास के इलाकों में साइकिल चलाया करती थीं। मुझे लॉन्ग ड्राइव और रेडियो पर तेज आवाज में संगीत सुनना पसंद था। उस समय की जिंदगी में एक अलग तरह की मिठास थी। मैं बेफिक्र थी, लेकिन मेरे अंदर कुछ नया करने और अपनी सीमाओं को तोड़ने की बेचैनी भी थी।''

अपने उस पुराने रूप को याद करते हुए लिसा ने खुद से सवाल किया, ''क्या मैं सच में 80 के दशक की बच्ची थीं? मजबूत, अपने फैसले खुद लेने वाली और मुश्किलों का सामना करने वाली... समय के साथ जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। जिंदगी में आए अचानक बदलावों और ऐसे मोड़ों, जिन्हें मैंने खुद नहीं चुना, ने उनके व्यक्तित्व को और गहरा किया है।''

लिसा के आखिर में लिखा, ''मेरे आज के वर्जन को अपने पुराने 80 के दशक वाले दौर की एक बार फिर जरूरत महसूस होती है। शायद मुझे फिर से उस दौर को जीने की जरूरत है।''

--आईएएनएस

पीके/पीएम

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