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'वंदे मातरम' के अपमान को दंडनीय बनाने वाला बिल राज्यसभा में पेश, हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित

'वंदे मातरम' के अपमान को दंडनीय बनाने वाला बिल राज्यसभा में पेश, हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित
'वंदे मातरम' के अपमान को दंडनीय बनाने वाला बिल राज्यसभा में पेश, हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। वामपंथी दलों के सदस्यों ने शुक्रवार को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को कानूनी सुरक्षा देने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। राज्यसभा में हंगामा होने के कारण सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' राज्यसभा में पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन करना है।

मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान का अपमान करने पर तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

प्रस्तावित संशोधन में 'वंदे मातरम' के अपमान पर भी इसी तरह की सजा का प्रावधान है। वामपंथी दलों, खासकर सीपीआई (एम) ने इसकी कड़ी आलोचना की है और इसे असंवैधानिक तथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

राज्यसभा सदस्य और सीपीआई (एम) के नेता जॉन ब्रिटास ने नियम 67 के तहत इसे पेश किए जाने पर आपत्ति जताते हुए नोटिस दिया। ब्रिटास ने कहा, "वे किसी कानून के जरिए देशभक्ति और राष्ट्रवाद पैदा नहीं कर सकते।"

ए. रहीम और संतोष कुमार पी. समेत सीपीआई के अन्य सदस्यों ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए नोटिस दिए।

संतोष कुमार पी. ने कहा कि यह विधेयक छात्र आंदोलन से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए लाया गया है। वंदे मातरम हमें एकजुट करता है, बांटता नहीं।

विधेयक पेश करने वाले गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन को याद दिलाया कि संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को समान दर्जा दिया था और सरकार के मौजूदा कदम का बचाव किया।

उन्होंने कहा कि 24 जनवरी 1950 से ही 'वंदे मातरम' को उचित सम्मान मिलता रहा है और यह संशोधन इसके लिए कानूनी सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

विधेयक पेश किए जाने पर सदन में हंगामा हुआ। विपक्ष के नरम पड़ने के कोई संकेत न मिलने पर उपसभापति हरिवंश सिंह ने कार्यवाही 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

नए प्रावधानों के तहत, 'वंदे मातरम' के गायन में बाधा डालने या किसी भी तरह से इसका अपमान करने पर सजा होगी। इस घटनाक्रम ने जबरदस्त राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

सीपीआई(एम) का तर्क है कि यह कानून सजा के जरिए देशभक्ति थोपने की कोशिश करके लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यक्तिगत आजादी को कमजोर करता है।

यह विधेयक मानसून सत्र के पांचवें दिन पेश किया गया है। यह सत्र पहले ही नीट पेपर लीक कांड जैसे मुद्दों पर बार-बार हुए हंगामे की वजह से बाधित रहा है। अगले सप्ताह जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू होगी, तो सरकार आम सहमति बनाने की नई कोशिशें कर सकती है। हालांकि, वामपंथी दलों और विपक्ष के दूसरे समूहों के कड़े विरोध से संकेत मिलता है कि संसद में इस बिल को पास कराने में काफी हंगामे का सामना करना पड़ सकता है।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी

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