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लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, पाकिस्तान में वायु प्रदूषण से घट रही लोगों की उम्र

लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, पाकिस्तान में वायु प्रदूषण से घट रही लोगों की उम्र
लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, पाकिस्तान में वायु प्रदूषण से घट रही लोगों की उम्र

इस्लामाबाद, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान का लाहौर गुरुवार को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 419 दर्ज किया गया। इस बीच, एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वायु प्रदूषण के कारण पाकिस्तान में लोगों की जीवन प्रत्याशा औसतन 3.9 साल घट रही है और हर साल करीब 1.28 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो रही है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, आईक्यूएयर की वैश्विक रैंकिंग में 29 अक्टूबर को सुबह 10 से 11 बजे के बीच लाहौर पहले स्थान पर रहा। मिस्र की राजधानी काहिरा 274 एक्यूआई के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं, पाकिस्तान का कराची 165 एक्यूआई के साथ दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में आठवें स्थान पर रहा।

पंजाब सरकार के वायु गुणवत्ता निगरानी डैशबोर्ड के अनुसार, प्रांत के कई शहरों में भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है। प्रांतीय सूची में कसूर सबसे ऊपर रहा। ननकाना साहिब में एक्यूआई 261, हाफिजाबाद में 250, साहिवाल में 210, शेखूपुरा में 205, झंग में 203 और राजनपुर में 201 दर्ज किया गया। इसके अलावा मुल्तान और गुजरांवाला में एक्यूआई 194, भक्कर में 186 और वेहारी में 181 रहा।

इस बीच, पाकिस्तान एयर क्वालिटी इनिशिएटिव (पीएक्यूआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण के कारण पाकिस्तान में लोगों की जीवन प्रत्याशा औसतन 3.9 साल कम हो रही है। प्रदूषण के चलते हर साल करीब 1.28 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वायु प्रदूषण से देश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ पड़ रहा है। इससे पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 6.5 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित होता है।

'अनवीलिंग पाकिस्तान्स एयर पॉल्यूशन: ए नेशनल लैंडस्केप रिपोर्ट ऑन हेल्थ रिस्क्स, सोर्सेज एंड सॉल्यूशंस' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में पाकिस्तान में पहली बार विभिन्न क्षेत्रों से होने वाले उत्सर्जन का एकीकृत आकलन पेश किया गया है। इसमें कई शहरों की वायु गुणवत्ता का विश्लेषण करने के साथ प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान की गई है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इस अध्ययन में कराची, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और पेशावर जैसे शहरों में प्रदूषण के स्तर और उसके कारणों की पड़ताल की गई है। रिपोर्ट में ऐसे उपाय भी बताए गए हैं, जिनसे प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। रिपोर्ट में कार्बन डाइऑक्साइड, सूक्ष्म कण पदार्थ (पीएम2.5), नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) और सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2) के उत्सर्जन का आकलन किया गया है। इसमें चार शहरी वायु क्षेत्रों में अलग-अलग सेक्टर से होने वाले उत्सर्जन का भी विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर में पीएम2.5 की सालाना औसत सांद्रता 110 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सालाना निर्धारित पांच माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की गाइडलाइन से 22 गुना से भी ज्यादा है। प्रदूषण के इस स्तर के लंबे समय तक संपर्क में रहने से लाहौर में लोगों की जीवन प्रत्याशा सात साल तक कम हो सकती है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, लाहौर में पीएम2.5 प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत परिवहन क्षेत्र है। इसके बाद उद्योगों की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत और ईंट भट्ठों की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत है। इन स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषक कण शहर की वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। सर्दियों में मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को और बढ़ा देती हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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