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लद्दाख का पहला मेडिकल कॉलेज शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से शुरू होगा

लद्दाख का पहला मेडिकल कॉलेज शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से शुरू होगा
लद्दाख का पहला मेडिकल कॉलेज शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से शुरू होगा

लेह, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लद्दाख के पहले मेडिकल कॉलेज की स्थापना को मंजूरी दे दी है, जो शैक्षणिक वर्ष 2027-38 से शुरू होगा।

उपराज्यपाल सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "लद्दाख के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि!"

उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से मेडिकल कॉलेज के संचालन को मंजूरी दिए जाने के बाद लेह में लद्दाख का पहला मेडिकल कॉलेज साकार होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने यह भी कहा कि मैं स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जी का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मेरे अनुरोध पर ध्यान दिया और संकाय एवं सहायक कर्मचारियों की भर्ती शुरू करने से पहले बुनियादी ढांचे के 80 प्रतिशत पूर्ण होने की आवश्यकता से एक बार की छूट प्रदान की।

इस महत्वपूर्ण हस्तक्षेप से हमें 103 स्वीकृत नियमित पदों के लिए चरणबद्ध, प्रारंभिक भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की अनुमति मिलती है, जबकि हमारे समर्पित शैक्षणिक बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा कि यह मंजूरी लद्दाख के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा को पूरा करती है। इससे हमारे युवाओं को घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे और पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलेगा।

केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन चिकित्सा छात्रों के हमारे पहले बैच के स्वागत के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा।

जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की लेह बेंच का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 18 अक्टूबर को किया।

उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट और जम्मू एवं कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के साथ-साथ लद्दाख के उपराज्यपाल और वरिष्ठ नागरिक एवं पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे।

केंद्र सरकार पहले ही लेह में आईआईटी और आईआईएम जम्मू के परिसरों की स्थापना को मंजूरी दे चुकी है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्र के युवाओं को केंद्र शासित प्रदेश से बाहर जाए बिना ही सर्वोत्तम तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त हो सके।

--आईएएनएस

एमएस/

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