Samachar Nama
×

लद्दाख में स्थानीय स्वशासन की दिशा में बड़ा कदम, 100 निर्वाचन क्षेत्रों को मिली अधिसूचना

लद्दाख में स्थानीय स्वशासन की दिशा में बड़ा कदम, 100 निर्वाचन क्षेत्रों को मिली अधिसूचना
लद्दाख में स्थानीय स्वशासन की दिशा में बड़ा कदम, 100 निर्वाचन क्षेत्रों को मिली अधिसूचना

लेह, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। लद्दाख क्षेत्र में लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने बुधवार को आठ लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के लिए 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना जारी की।

एक्स पर एक पोस्ट में उपराज्यपाल ने लिखा कि लद्दाख में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि!

एलएएचडीसी (संशोधन) विनियमन, 2026 के तहत, मैंने आठ लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के लिए 100 निर्वाचन क्षेत्रों की आधिकारिक रूप से अधिसूचना जारी की है।

इस निर्णय से पार्षदों की संख्या मौजूदा 52 से बढ़कर लगभग दोगुनी होकर 100 हो गई है, जो हमारी नवगठित परिषदों में लागू है: लेह: 22, कारगिल: 21, सांकू: 13, चांगथांग: 10, नुब्रा, शाम और ज़ांस्कर: 9-9 और द्रास: सात।

यह एक तर्कसंगत और न्यायसंगत आवंटन है जो पंचायत हलकों और नगर निगम वार्डों को आधार इकाई मानता है, और मतदाता संख्या और भौगोलिक क्षेत्र दोनों को उचित महत्व देता है।

मुझे विश्वास है कि सीटों की बढ़ी हुई संख्या से स्थानीय प्रतिनिधित्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत होगा और लद्दाख के हर कोने में समावेशी शासन को बढ़ावा मिलेगा।

इस निर्णय का मुख्य महत्व परिषद की संख्या को लगभग दोगुना करना है: इस कदम से लद्दाख में निर्वाचित सीटों की कुल संख्या पहले की 52 सीटों से बढ़कर लगभग दोगुनी होकर 100 हो गई है। इससे स्थानीय राजनीतिक भागीदारी में व्यापक विस्तार होगा।

पहले, निर्वाचित पर्वतीय परिषदें केवल लेह और कारगिल जिलों में ही थीं। 2026 में लद्दाख के जिला पुनर्गठन के बाद, इस ढांचे के तहत परिषदों को आधिकारिक तौर पर सभी छह नवगठित जिलों (शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर, द्रास और संजू) को पूर्ण शक्तियां प्राप्त हो गई हैं।

लद्दाख प्रशासन के अनुसार, स्थानीय पंचायत हलकों और नगर निगम वार्डों को आधार इकाई मानकर निर्वाचन क्षेत्रों का युक्तिकरण किया गया है। इससे भौगोलिक क्षेत्र और जनसंख्या घनत्व के आधार पर उचित वितरण सुनिश्चित होता है।

आठों परिषदों में से प्रत्येक के पास जिला स्तर पर व्यापक अधिकार होंगे, जिनमें भूमि आवंटन, समर्पित परिषद निधि का प्रबंधन, स्थानीय कर लगाना और जिला कैडर में भर्ती को विनियमित करना शामिल है।

--आईएएनएस

एमएस/

Share this story