आतंकवाद पर भारत की चिंताओं पर अमेरिका की असंवेदनशीलता आपसी रिश्तों के लिए समस्या : जयशंकर
न्यूयॉर्क, 29 सितंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं के प्रति अमेरिका का असंवेदनशील होना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक समस्या है।
जयशंकर ने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने 'एक पड़ोसी देश' का जिक्र किया, जो आतंकवाद को अपनी नीति के तौर पर इस्तेमाल करता है। इससे उनका इशारा पाकिस्तान की ओर साफ था।
उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों की आलोचना के तौर पर भी देखी गई है। इस दौरान पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी भूमिका को नजरअंदाज किया गया है।
जयशंकर ने कहा, "शायद बहुत कम देश ऐसे होंगे जिन्होंने उस तरह के आतंकवाद का सामना किया हो, जैसा हमने एक पड़ोसी देश से किया है। यह कई दशकों से जानबूझकर अपनाई गई नीति का हिस्सा रहा है।"
उन्होंने कहा कि इसी वजह से आतंकवाद का मुद्दा भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। जयशंकर ने कहा कि अगर कोई मुद्दा हमारे लिए इतना ज्यादा मायने रखता है और उसे लेकर पर्याप्त समझ, संवेदनशीलता या सहानुभूति नहीं है, तो मुझे लगता है कि इससे समस्या पैदा होती है।
उन्होंने कहा, "अगर मेरी सबसे बड़ी चिंताओं में से किसी एक को मेरा साझेदार पूरी तरह नहीं समझता है, तो जाहिर तौर पर इसका असर रिश्तों पर पड़ता है।"
जयशंकर ने ये बातें न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। उनसे पूछा गया था कि भारत और अमेरिका के रिश्तों को और बेहतर बनाने में कौन से मुद्दे रुकावट बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार के अलावा आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं के प्रति पर्याप्त संवेदनशीलता न होना भी एक अहम मुद्दा है।
पाकिस्तान के मामले में ट्रंप ने आतंकवाद के मुद्दे से दूरी बना ली है, जो पिछली अमेरिकी सरकारों की नीति से बदलाव है।
इससे पहले अमेरिका ने वैश्विक आतंकवाद को समर्थन देने में इस्लामाबाद की भूमिका को माना था। यह मुद्दा खास तौर पर 2001 में अल-कायदा के न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और वॉशिंगटन के पास स्थित पेंटागन पर हमलों के बाद चर्चा में आया था।इन हमलों में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल तब और बढ़े, जब अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में रह रहा था और वहीं उसका पता चला।
--आईएएनएस
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