कोलकाता पुलिस ने ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के लिए वर्दी पहनना अनिवार्य किया
कोलकाता, 26 मई (आईएएनएस)। कोलकाता पुलिस ने एक आदेश जारी कर अपने सभी स्तरों के कर्मियों को सिविल ड्रेस में ड्यूटी पर करने पर रोक लगा दी है। हालांकि कुछ विशेष विभागों से जुड़े कर्मियों को छूट दी गई है।
जिन विभागों को छूट दी गई है उनमें जांच विभाग, विशेष शाखा, प्रवर्तन शाखा, विशेष कार्य बल और साइबर अपराध प्रभाग शामिल हैं, क्योंकि सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में रहना उनके ड्यूटी का अभिन्न अंग है। यदि इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर के विभागों से जुड़े किसी अधिकारी या कर्मचारी को वर्दी के बिना आधिकारिक ड्यूटी पर जाना आवश्यक हो, तो संबंधित कर्मी को उच्च अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए शहर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में पुलिस आयुक्त अजय नंद के कार्यालय से 24 मई को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
उन पांच विभागों को छोड़कर, सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को छापेमारी, गिरफ्तारी, कानून व्यवस्था बनाए रखने या किसी अन्य आधिकारिक ड्यूटी के दौरान अनिवार्य रूप से वर्दी पहननी होगी।
अधिसूचना में, आयुक्त कार्यालय ने राज्य में वाम मोर्चा शासन के दौरान 1997 में डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख किया है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने व्यक्तियों की गिरफ्तारी और हिरासत के संबंध में पुलिस के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश निर्धारित किए थे। यह फैसला पुलिस के व्यापक दुर्व्यवहार, हिरासत में यातना और लॉक-अप में होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए जारी किया गया था।
उस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने आधिकारिक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को न केवल वर्दी पहनने का निर्देश दिया, बल्कि यह भी निर्देश दिया कि गिरफ्तारी या पूछताछ करने वाले सभी पुलिसकर्मियों को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले नाम टैग पहनने होंगे जिन पर पदनाम स्पष्ट रूप से अंकित हों।
सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत मौलिक अधिकारों के संरक्षण के संदर्भ में एक ऐतिहासिक निर्णय माना जाता है।
--आईएएनएस
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