केरल पीएससी में धांधली के आरोपों पर घिरे चेयरमैन बैजू, भाजपा ने बर्खास्तगी की मांग की
तिरुवनंतपुरम, 5 नवंबर (आईएएनएस)। केरल पीएससी के चेयरमैन एम.आर. बैजू पर दबाव बढ़ता जा रहा है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने परीक्षा घोटाले की जांच तेज कर दी है और भाजपा ने पूरे कमीशन बोर्ड को बर्खास्त करने की मांग शुरू कर दी है।
एसआईटी बैजू से फिर पूछताछ करना चाहती है। इस बार उसके साथ गिरफ्तार किए गए एडिशनल सेक्रेटरी आर. हरि को भी बिठाया जाएगा, ताकि स्टेट प्लानिंग बोर्ड की परीक्षा में हुई धांधली को लेकर दोनों का आमना-सामना कराया जा सके।
हालांकि, सूत्रों के मुताबिक चेयरमैन पूछताछ से बचने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। क्राइम ब्रांच को शक है कि बैजू के मनमाने फैसलों की वजह से ही ये गड़बड़ियां हुईं।
पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए हरि ने 10 सवालों की जांच न होने में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि इसकी जिम्मेदारी अब रिटायर हो चुके डिप्टी सेक्रेटरी सतीश की थी और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि कुछ सवालों की जांच नहीं की गई है। एसआईटी ने उनके इस स्पष्टीकरण को नहीं माना है।
यह परीक्षा स्टेट प्लानिंग बोर्ड में 'चीफ' के पद के लिए आयोजित की गई थी। पहले पेपर में कुल 228 उम्मीदवार शामिल हुए थे, हालांकि 10 से 18 नंबर तक के सवाल, जो 58 अंकों के थे, किसी भी उम्मीदवार के लिए चेक नहीं किए गए।
51 उम्मीदवारों के मामले में, केवल 1 से 9 और 18 से 28 नंबर तक के सवालों की ही जांच की गई।
बाकी 177 उम्मीदवारों के लिए, केवल 1 से 8 और 18 से 28 नंबर तक के सवालों का ही मूल्यांकन किया गया।
जांच में पता चला है कि एक फर्जी सॉफ्टवेयर लॉगिन के जरिए मूल्यांकन प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया था।
पीएससी के सदस्यों ने जांचकर्ताओं को बताया है कि सवाल तैयार करने वाले पैनल और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करने वाले अधिकारियों को चुनने का फैसला अकेले बैजू ने ही लिया था।
पीएससी के सेक्रेटरी साजू जॉर्ज ने भी क्राइम ब्रांच को बताया है कि बैजू बिना किसी से सलाह लिए फैसले लेते थे और जब भी कोई विवाद खड़ा होता तो वे अधिकारियों पर दोष मढ़ देते थे। उन्होंने कहा कि बैजू और हरि मिलकर फैसले लेते थे, लेकिन चेयरमैन अक्सर अपनी मनमानी करते थे।
इस बीच भाजपा का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने वाला है, ताकि पीएससी बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा सके।
इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक, राजीव चंद्रशेखर, तथा राज्यसभा के मनोनीत सदस्य सी. सदानंदन और पीटी. उषा शामिल हैं। यह कदम निवर्तमान गवर्नर राजेंद्र अर्लेकर द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए एक पत्र के बाद उठाया गया है। इस पत्र में उन्होंने आयोग से जुड़े गंभीर आरोपों के मद्देनजर मौजूदा पीएससी बोर्ड को बर्खास्त करने की मांग की है।
इस ताजा मामले ने आयोग के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी विश्वसनीयता परीक्षा घोटाले के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है।
वहीं दूसरी ओर, सीपीआई (एम) समर्थक पीएससी कर्मचारी संघ विरोध-प्रदर्शन कर रहा है। उनकी मांग है कि पीएससी को उसके हाल पर छोड़ दिया जाए और किसी भी बदले की भावना वाली कार्रवाई से उसकी विश्वसनीयता को नुकसान न पहुंचाया जाए।
--आईएएनएस
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