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केरल में सियासी तकरार तेज, मंत्री ने राज्यपाल और ईडी कार्रवाई पर उठाए प्रश्न

केरल में सियासी तकरार तेज, मंत्री ने राज्यपाल और ईडी कार्रवाई पर उठाए प्रश्न
केरल में सियासी तकरार तेज, मंत्री ने राज्यपाल और ईडी कार्रवाई पर उठाए प्रश्न

तिरुवनंतपुरम, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। आरएसपी नेता और केरल के वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने मंगलवार को लोक सेवा आयोग (पीएससी) के सदस्यों को बर्खास्त करने की राज्यपाल की सिफारिश पर सवाल उठाया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के पीछे राजनीतिक मकसद होने का आरोप लगाया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसपी राज्यपाल के रुख से सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों से संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयास स्वीकार्य नहीं हैं।

उन्होंने पिनाराई विजयन के खिलाफ मामले में ईडी की कार्रवाई के समय पर भी सवाल उठाया।

लंबे समय से जांच में तेजी नहीं लाई गई थी।

उन्होंने कहा कि एजेंसी की हालिया कार्रवाई से उसके इरादों पर सवाल उठते हैं।

मंत्री ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पीएससी सदस्यों की सामूहिक बर्खास्तगी की सिफारिश की है।

पीएससी एक संवैधानिक संस्था है जो सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि मनमानी कार्रवाई के जरिए ऐसी संस्थाओं को कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं है।

शिबू बेबी जॉन ने कहा कि आरएसपी इस मुद्दे पर राज्यपाल के रुख का समर्थन नहीं करती।

पिनाराई विजयन से जुड़े ईडी की जांच का जिक्र करते हुए मंत्री ने आरोप लगाया कि एजेंसी की जांच महज एक दिखावा बनकर रह गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्रीय एजेंसियां ​​इतने लंबे समय तक निष्क्रिय क्यों रहीं और पिछली पिनाराई सरकार के कार्यकाल में इस मामले को ठीक से आगे क्यों नहीं बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि ईडी का अब नए सिरे से कदम उठाना संदिग्ध है, और आरोप लगाया कि इसके पीछे स्पष्ट राजनीतिक मकसद है।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार केंद्रीय एजेंसी द्वारा अपनाई गई राह पर यूं ही नहीं चलेगी।

उन्होंने कहा कि जनता ने यूडीएफ सरकार को ईडी के निर्देशों के अनुसार कार्य करने के लिए नहीं चुना था।

सरकार को संवैधानिक सिद्धांतों और जनता की भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने होंगे, न कि जांच एजेंसियों के राजनीतिक दांव-पेचों से प्रभावित होना होगा।

उनकी ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये सत्ताधारी यूडीएफ खेमे के भीतर से आई हैं।

ये टिप्पणियां इस बात पर जोर देती हैं कि सरकार को केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का अंधाधुंध समर्थन करने के बजाय जांच और संवैधानिक मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट रखना चाहिए।

इन दोनों मुद्दों ने संवैधानिक अधिकारियों, जांच एजेंसियों और चुनी हुई सरकार के बीच संबंधों को भी उजागर किया है।

--आईएएनएस

एमएस/

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