केरल हाईकोर्ट से पिनाराई विजयन को बड़ी राहत, सीएमआरएल मामले में विजिलेंस जांच पर लगाई रोक
कोच्चि, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को बड़ी राहत देते हुए, केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को अपने एकल न्यायाधीश के एक आदेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश में सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में उनके, उनकी बेटी वीणा, और उनके दामाद तथा सीपीआई-एम विधायक मोहम्मद रियास के खिलाफ विजिलेंस एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति के. एम. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने 9 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देने वाले उन तीन लोगों और अन्य की अपीलों को स्वीकार कर लिया है।
अदालत ने एकल न्यायाधीश के फैसले पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि अगले आदेश तक एफआईआर की जांच रोक दी जाए।
अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तारीख तय की है।
यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट के 21 अक्टूबर के उस हस्तक्षेप के बाद हुआ है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि विजयन और अन्य लोग एकल न्यायाधीश के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर अंतरिम रोक भी लगा दी थी, ताकि हाई कोर्ट उनकी अपीलों पर सुनवाई कर सके। सोमवार की सुनवाई के दौरान, अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि एकल न्यायाधीश ने उन लोगों की बात सुने बिना ही एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया, जो इससे सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे थे।
उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि एकल न्यायाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, जबकि यह निर्णय आमतौर पर जांच एजेंसी को लेना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री से 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' के तहत कोई संज्ञेय अपराध बनता है। अपीलकर्ताओं ने आगे कहा कि वीणा की कंपनी 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' से जुड़े लेन-देन के आधार पर विजयन या रियास पर आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।
उन्होंने भ्रष्टाचार की जांच शुरू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया के संबंध में भी आपत्तियां उठाईं। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उसने ईडी से मिली सामग्री की प्रारंभिक जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया था।
महाधिवक्ता ने कहा कि बाद में, एकल न्यायाधीश के निष्कर्षों को देखते हुए सरकार ने एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया। ईडी ने जांच पर रोक लगाने का विरोध करते हुए तर्क दिया कि जब किसी जानकारी से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, तो राज्य के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होता है।
मूल याचिकाकर्ता के वकील ने भी इस कानूनी कार्यवाही का बचाव किया।
यह मामला 'कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड' (सीएमआरएल) और 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' के बीच वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
ईडी ने इन लेन-देन से जुड़ी सामग्री राज्य पुलिस के साथ साझा की थी। 9 अक्टूबर को, एकल न्यायाधीश ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो को विजयन, वीणा, रियास और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया और एसआईटी के जरिए प्रारंभिक जांच कराने के सरकार के फैसले को रद्द कर दिया।
इस ताजा आदेश में आरोपों के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इनकी जांच अंतिम सुनवाई के दौरान की जाएगी।
--आईएएनएस
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