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सबरीमला सोना चोरी मामले में देरी पर केरल हाईकोर्ट सख्त, एसआईटी को चेतावनी

कोच्चि, 27 जनवरी (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को सबरीमला से जुड़े गोल्ड चोरी मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने आरोपपत्र दाखिल करने में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इससे मुख्य आरोपियों को वैधानिक जमानत मिल रही है और जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबरीमला सोना चोरी मामले में देरी पर केरल हाईकोर्ट सख्त, एसआईटी को चेतावनी

कोच्चि, 27 जनवरी (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को सबरीमला से जुड़े गोल्ड चोरी मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने आरोपपत्र दाखिल करने में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इससे मुख्य आरोपियों को वैधानिक जमानत मिल रही है और जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब तक एसआईटी द्वारा दाखिल दो आरोपपत्रों में कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एक आरोपी को वैधानिक जमानत भी मिल गई है। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की पीठ ने चेतावनी दी कि ऐसी चूक से जनता का जांच एजेंसियों पर भरोसा कमजोर होता है और जांच की गंभीरता पर संदेह पैदा होता है।

अदालत ने कहा कि वैधानिक समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल न होने के कारण आरोपियों का रिहा होना व्यापक शंका को जन्म देता है। कोर्ट ने सवाल किया कि एसआईटी ने इस स्थिति को रोकने के लिए समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए।

न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की, “जब आरोपी डिफॉल्ट के कारण रिहा होते हैं, तो इससे जांच की साख पर अनिवार्य रूप से साया पड़ता है।”

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि देवस्वोम बोर्ड के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और द्वारपालका व कट्टिलप्पाला- दोनों मामलों के आरोपी मुरारी बाबू को पहले ही वैधानिक जमानत मिल चुकी है।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों मामलों के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को द्वारपालका मामले में जमानत मिल चुकी है और कट्टिलप्पाला मामले में 90 दिनों की वैधानिक अवधि 2 फरवरी को पूरी होने पर वह भी वैधानिक जमानत का पात्र हो जाएगा।

ये टिप्पणियां आरोपी और स्मार्ट क्रिएशंस के सीईओ पंकज भंडारी द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की गईं। भंडारी ने दलील दी कि आरोपी बनाए जाने से पहले ही वह छह बार बयान दे चुका है और जांच में पूरा सहयोग किया है, इसलिए उसकी गिरफ्तारी अनावश्यक थी।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में गिरफ्तारी टाली नहीं जा सकती थी। साथ ही, कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि गिरफ्तार व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी कानूनी संरक्षण, जिनमें वैधानिक जमानत भी शामिल है, दिए जाने चाहिए।

अदालत की चिंताओं पर जवाब देते हुए एसआईटी ने बताया कि कई प्रक्रियागत और साक्ष्य संबंधी बाधाओं के कारण आरोपपत्र तैयार करने में देरी हुई। एसआईटी ने कहा कि देवस्वोम बोर्ड के कार्यालयों और अन्य स्थानों से दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जबकि अपराध को निर्णायक रूप से साबित करने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक साक्ष्य अब भी प्राप्त होने बाकी हैं।

एसआईटी ने यह भी कहा कि भले ही आरोपी जमानत पर रिहा हो जाएं, लेकिन जांच का लक्ष्य दोषियों को सजा दिलाना और जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाना बना रहेगा।

इस मुद्दे पर मंगलवार को केरल विधानसभा में भी तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप हुए। वहीं, विपक्ष के दो विधायकों ने विधानसभा के सामने धरना दिया और आरोप लगाया कि इस मामले में मुख्यमंत्री परोक्ष रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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