सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला: पिनाराई विजयन, वीणा और रियास के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित
कोच्चि, 29 सितंबर (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा विजयन और दामाद मोहम्मद रियास के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने मामले में विस्तृत दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
मामला कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) और वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच के दौरान इन कथित लेनदेन से संबंधित सामग्री जुटाई थी।
अधिवक्ता के.एम. शाहजहां ने ईडी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपों की प्रारंभिक जांच किए बिना एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। महाधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि ईडी द्वारा भरोसा की गई मुख्य सामग्री एक डायरी है और केवल डायरी के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।
सरकार ने यह भी कहा कि याचिका विचारणीय नहीं है और मामला दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच जरूरी है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि ईडी ने अन्य सामग्री के साथ बयान भी अदालत के समक्ष पेश किए हैं। ईडी ने अदालत को राज्य के पुलिस महानिदेशक को भेजे गए उस पत्र की जानकारी दी, जिसमें विजयन और रियास के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई थी।
ईडी ने जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों समेत अन्य सामग्री भी अदालत के समक्ष रखी। अदालत ने पूछा कि क्या ये बयान राज्य सरकार को उपलब्ध कराए गए थे। इस पर ईडी ने बताया कि बयानों की पूरी प्रतियां सरकार को नहीं दी गई हैं।
ईडी ने कहा कि उसके पत्र में दी गई जानकारी मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त है। एजेंसी ने यह भी कहा कि यदि पुलिस को जरूरत हो तो वह बयानों की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। ईडी ने दोहराया कि उसके द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और सामग्री के आधार पर मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि ईडी पुलिस की तरह जांच एजेंसी नहीं है और उसका काम जानकारी एकत्र करना तथा अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आगे की कार्रवाई करना है। हालांकि, हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि ईडी एक जांच एजेंसी है।
अब हाईकोर्ट को यह तय करना है कि क्या राज्य पुलिस प्रारंभिक जांच किए बिना ईडी की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर एफआईआर दर्ज कर सकती है।
ईडी के राज्य पुलिस प्रमुख को भेजे गए पत्र के आधार पर मुख्यमंत्री सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार ने पहले ही एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
--आईएएनएस
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