केरल ईडी हमला मामले में जांच तेज, डिजिटल सबूतों से साजिशकर्ताओं का खुलासा संभव
तिरुवनंतपुरम, 3 जून (आईएएनएस)। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर तलाशी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हुए हमले के मामले में केंद्रीय एजेंसी और पुलिस ने जांच तेज कर दी है। संभावनाएं हैं कि डिजिटल सबूत साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश कर सकते हैं।
इस मामले की जांच के लिए 30 सदस्यों वाली एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। टीम ने कोच्चि में ईडी अधिकारियों के बयान पहले ही दर्ज कर लिए हैं, जिनमें सहायक निदेशक सनित रेड्डी भी शामिल हैं। इसके अलावा तलाशी से संबंधित वारंट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी एकत्र किए गए हैं।
ईडी अधिकारियों ने कथित तौर पर एसआईटी को बताया है कि यह हमला कोई अचानक हुआ विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित हमला था। एजेंसी का कहना है कि इस घटना में एक बड़ी साजिश शामिल थी, जिसका उद्देश्य उसके आधिकारिक कर्तव्यों में बाधा डालना था। एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि क्या राजनीतिक नेताओं या स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों ने हमलावरों को जुटाने में कोई भूमिका निभाई थी।
जांच टीमें डिजिटल साक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिनमें उन लोगों के फोन रिकॉर्ड और व्हाट्सएप मैसेज शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर इस हमले में हिस्सा लिया था। तलाशी से ठीक पहले और उसके दौरान किए गए कॉल व नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हुए संवादों की जांच साइबर सेल की मदद से की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ये रिकॉर्ड इस बात का खुलासा कर सकते हैं कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई समन्वित योजना थी।
अब तक, पुलिस की ओर से दर्ज किए गए मामले में लगभग 300 व्यक्तियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने घटना के दृश्यों (फुटेज) के आधार पर 46 लोगों की पहचान कर ली है और अन्य लोगों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
हालांकि, ईडी ने यह चिंता जताई है कि जांच सिर्फ निचले स्तर के कार्यकर्ताओं तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर इस हमले का निर्देश दिया था। एजेंसी गिरफ्तार आरोपियों की जमानत की कार्यवाही में सत्र न्यायालय के समक्ष हस्तक्षेप करने पर भी विचार कर रही है।
जांच एजेंसी ने जमानत का विरोध करने और कथित साजिश को साबित करने के लिए वीडियो फुटेज व अन्य साक्ष्य एकत्र करना शुरू कर दिया है। ईडी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस घटना के बारे में जानकारी दी है और सीबीआई जांच की मांग करने की संभावना तलाश रही है।
एजेंसी ने ऐसे ही मिलते-जुलते मामलों की ओर इशारा किया है, जिनमें दूसरे राज्यों में ईडी अधिकारियों पर हमलों के बाद सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली थी।
इस मामले ने तब राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया, जब एलआईटी प्रमुख आर. प्रशांत को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। उन्हें वामपंथी संगठनों के करीब माना जाता है, जिससे विपक्ष ने संभावित पक्षपात को लेकर उनकी आलोचना की है। हालांकि, अब इस अधिकारी के सामने एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की चुनौती है।
--आईएएनएस
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