क्योंझर केस: बहन के कंकाल को बैंक ले जाने मामले की प्रारंभिक जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही
भुवनेश्वर, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। ओडिशा के क्योंझर जिले में हुए चौंकाने वाले मामले की जांच कर रहे रेवेन्यू डिविजनल कमिश्नर संग्राम केशरी मोहापात्रा ने गुरुवार को कहा कि प्रारंभिक जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। इस घटना में एक व्यक्ति को कथित तौर पर अपनी बहन के शव को कब्र से निकालकर उसकी अस्थियां बैंक ले जाने के लिए मजबूर किया गया था ताकि डेथ क्लेम की प्रक्रिया पूरी हो सके।
मोहापात्रा ने गुरुवार को जांच शुरू करते हुए जिटू मुंडा के घर और ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा का दौरा किया और 27 अप्रैल को हुई घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी ली।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ''प्रारंभिक जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है और व्यक्ति को सेवा देने से मना किया गया। बैंक में ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि बैंक कर्मचारी और आदिवासी व्यक्ति के बीच क्या बातचीत हुई थी। हालांकि मृतका कला मुंडा और उनके भाई जिटू मुंडा नियमित रूप से बैंक आते थे और अधिकारी उन्हें जानते थे। उनके खाते से पहले भी करीब आठ बार पैसे निकाले गए थे।''
आरडीसी (नॉर्दर्न रेंज) ने यह भी बताया कि वह यह भी जांच करेंगे कि फरवरी में मृत्यु होने के बावजूद कला मुंडा का मृत्यु प्रमाण पत्र उसके भाई जिटू मुंडा को समय पर क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इसी लापरवाही के कारण जिटू मुंडा को अपनी बहन के शव को कब्र से निकालकर बैंक ले जाना पड़ा, ताकि उसके खाते में जमा 19,300 रुपए निकाले जा सकें।
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और सोशल मीडिया पर भी लोगों ने बैंक के रवैये की कड़ी आलोचना की। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी इस मामले पर चिंता जताते हुए मंगलवार को आरडीसी स्तर की जांच के आदेश दिए थे।
यह मुद्दा गुरुवार को ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र में भी उठा, जहां विपक्षी बीजू जनता दल और कांग्रेस ने सदन में जोरदार हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने इस घटना को उठाते हुए कहा कि इससे राज्य की छवि देश और दुनिया में गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
--आईएएनएस
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