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करुणा अभियान: गुजरात की राज्यव्यापी पहल ने 4,900 से अधिक पक्षियों की जान बचाई

अहमदाबाद, 15 जनवरी (आईएएनएस)। गुजरात में घायल पक्षियों को बचाने और उनके इलाज के लिए शुरू किए गए 'करुणा अभियान' ने इस साल मकर संक्रांति पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
करुणा अभियान: गुजरात की राज्यव्यापी पहल ने 4,900 से अधिक पक्षियों की जान बचाई

अहमदाबाद, 15 जनवरी (आईएएनएस)। गुजरात में घायल पक्षियों को बचाने और उनके इलाज के लिए शुरू किए गए 'करुणा अभियान' ने इस साल मकर संक्रांति पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के अनुसार, 14 जनवरी, 2026 तक राज्य भर में कुल 5,439 पक्षियों का इलाज किया गया, जिनमें से 4,937 (91 प्रतिशत) को सफलतापूर्वक बचाया गया।

दरअसल, मकर संक्रांति और उसके आसपास के दिनों में राज्यभर में खूब पतंगें उड़ाई जाती हैं, जिससे कई बार पक्षियों को काफी नुकसान होता है। पतंगों और उनकी डोर की वजह से पक्षी घायल हो जाते हैं। इसलिए गुजरात में ऐसे पक्षियों के इलाज के लिए 'करुणा अभियान' शुरू किया गया है। इस अभियान में

पशु चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को शामिल किया गया है।

मंत्री ने करुणा अभियान को "जीवित प्राणियों के प्रति करुणा की एक अनूठी पहल" बताते हुए इसके बढ़ते प्रभाव और राज्यव्यापी पहुंच पर प्रकाश डाला।

गुजरात ने नीति, संरक्षण कार्यक्रमों, बचाव नेटवर्क और समुदाय-संचालित पहलों के मिश्रण के माध्यम से वन्यजीवों की रक्षा और जानवरों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत और बहुस्तरीय ढांचा तैयार किया है।

यह राज्य भारत में एशियाई शेरों की एकमात्र आबादी का घर है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त गिर संरक्षण परियोजना के माध्यम से संरक्षित किया जाता है। इस परियोजना में पर्यावास बहाली, शिकार-विरोधी गश्त, रेडियो कॉलर लगाना, वन्यजीव गलियारे और वैज्ञानिक निगरानी शामिल हैं।

गुजरात में वन्यजीव बचाव और त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयों का एक मजबूत नेटवर्क भी है, जिसे वन विभाग, गैर सरकारी संगठनों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का समर्थन प्राप्त है। ये इकाइयां पशुओं की चोटों, मानव-वन्यजीव संघर्ष और आपात स्थितियों में सहायता प्रदान करती हैं।

करुणा अभियान जैसी पहल पतंगबाजी के मौसम में घायल पक्षियों को बचाने के लिए पशु चिकित्सकों और हजारों स्वयंसेवकों को जुटाती है, जबकि जीवदया चैरिटेबल ट्रस्ट, वन विभाग के अस्पताल और वन्यजीव पुनर्वास केंद्र जैसे विशेष केंद्र चौबीसों घंटे चिकित्सा देखभाल प्रदान करते हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

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