कार्ति चिदंबरम ने एसआईआर की तुलना जिम क्रो कानूनों से की, बोले- यह लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश
नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने मंगलवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तुलना अमेरिका के जिम क्रो कानूनों से की। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया बहिष्करणकारी है।
उनकी यह प्रतिक्रिया चल रहे एसआईआर के दौरान दिल्ली के 31.63 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने के बाद आई है।
कार्ति चिदंबरम ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा, "भारत निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की गई यह एसआईआर प्रक्रिया, अलगाव के दौरान अमेरिका के जिम क्रो कानूनों के समान है। यह एक बहिष्कारकारी प्रक्रिया है, समावेशी नहीं।"
जिम क्रो कानून अमेरिका में राज्य और स्थानीय स्तर पर बनाए गए ऐसे कानून थे, जो मुख्य रूप से दक्षिणी राज्यों में लागू थे। इन कानूनों के जरिए नस्लीय भेदभाव को कानूनी मान्यता दी गई थी। ये कानून 1870 के दशक के अंत से लेकर 1960 के दशक के मध्य तक लागू रहे। इन कानूनों के तहत अश्वेत और श्वेत लोगों के लिए स्कूल, परिवहन, सार्वजनिक स्थान, रेस्तरां और अन्य सुविधाएं अलग-अलग रखी जाती थीं। इनका उद्देश्य अश्वेत समुदाय को समान अधिकारों और अवसरों से दूर रखना था।
कांग्रेस नेता ने 'यह स्वीकार करते हुए कि मतदाता सूची में उन लोगों के नाम नहीं होने चाहिए जो या तो कहीं और चले गए हैं या अब जीवित नहीं हैं, कहा, "यह प्रक्रिया इससे कहीं आगे जा रही है और इसका उद्देश्य कई लोगों को मताधिकार से वंचित करना है। पिछले चुनाव में मतदान कर चुके और वर्तमान निवासी मतदाताओं पर यह किस तरह की बोझिल जिम्मेदारी डाल रही है, यह दिल्ली में अब जिन नामों को नोटिस मिल रहे हैं, उनसे स्पष्ट हो रहा है।"
उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, विदेश मंत्री एस जयशंकर और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मिले नोटिसों का जिक्र करते हुए कहा, "यह स्पष्ट रूप से इस प्रक्रिया में एक व्यवस्थागत खामी की ओर इशारा करता है।"
उन्होंने कहा, "अगर लोगों को उसी निर्वाचन क्षेत्र में रहने और पिछले चुनाव में मतदान करने के बावजूद नोटिस मिल रहे हैं, तो सोचिए उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा होगा जिनकी आवाज में शक्ति नहीं है।"
चिदंबरम ने कहा कि इस प्रक्रिया में पूरी तरह से बदलाव की जरूरत है और उन्होंने चुनाव आयोग से 'अधिक पारदर्शी' और 'मतदाता-हितैषी' बनने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि मतदान के योग्य कोई भी व्यक्ति वंचित न रह जाए।”
इस बीच, कार्ति चिदंबरम ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के बारे में भी बात की और इसे युवाओं के लिए अपनी आवाज उठाने का मंच बताया। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा मंच है जिसके माध्यम से युवा अपनी आवाज उठा सकते हैं और अपनी चिंताओं को व्यक्त कर सकते हैं और यह एक अच्छा प्रयास है जिसे राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने शुरू किया है।”
इसके अलावा उन्होंने इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से जुड़े विवाद पर विपक्ष के नेता का बचाव किया। उन्होंने कहा, “व्यंग्य राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। क्या भाजपा ने व्यंग्य का सहारा नहीं लिया है? क्या उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं का मजाक नहीं उड़ाया है? मेरा मतलब है, अगर सैटरडे नाइट लाइव भारत में होता, तो भाजपा शायद उन सभी को गिरफ्तार कर लेती और उनके पूरे शो पर प्रतिबंध लगा देती।”
इससे पहले, इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता गांधी के साथ मंच साझा करते हुए एक हास्य कलाकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु में आयोजित होने पर इस कार्यक्रम का 'बहुत स्वागत' किया जाएगा और इसमें 'उत्साहपूर्वक भाग लिया जाएगा।
जब उनसे भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूछे गए उन सवालों के बारे में पूछा गया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने 1980 की मतदाता सूची में अपना नाम कैसे दर्ज कराया, जबकि वह उस समय भारत की नागरिक नहीं थीं, तो उन्होंने इसे 'अजीबोगरीब साजिश सिद्धांत' बताया।
--आईएएनएस
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