कर्नाटक में गन्ना किसानों का बड़ा आंदोलन, खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर किया घेराव
बेंगलुरु, 3 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में गन्ना किसानों ने मंगलवार को अपना राज्यव्यापी आंदोलन तेज कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मैसूरु में डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की जबकि बेलगावी में 'जेल भरो' आंदोलन शुरू किया। वे 5,500 रुपये प्रति टन की खरीद कीमत की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) मौजूदा 31 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम करे।
मैसूर में प्रदर्शनकारी किसानों ने डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय का गेट खोलकर अंदर जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसानों ने कार्यालय के बाहर सड़क जाम कर दी। उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग को धक्का दिया और ट्रैफिक रोकने के लिए अपनी खुद की बैरिकेडिंग लगा दी। वे सड़क पर ही डटे रहे और वहीं दोपहर का खाना भी पकाया।
इस आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में राज्य किसान संघ के अध्यक्ष बडागालापुरा नागेंद्र और राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरुबुरु शांतकुमार शामिल थे।
नागेंद्र ने बताया कि 26 अक्टूबर को बेलगावी में हुई एक बैठक में सभी किसान संगठन एकजुट हुए थे। उन्होंने तय किया कि वे एक साझा पत्र (लेटरहेड) के जरिए अपनी मांगों को एक साथ मिलकर सरकार के सामने रखेंगे।
उन्होंने कहा कि चीनी मिलों को 4,500 रुपये प्रति टन का भुगतान करना चाहिए और राज्य सरकार को इसमें 1,000 रुपये जोड़ने चाहिए, जिससे कुल खरीद मूल्य 5,500 रुपये प्रति टन हो जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) भी 31 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग की।
नागेंद्र ने एक विशेष 'चीनी नीति' की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, "हर साल किसानों को चीनी मिलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस मुद्दे का समाधान निकाला जाना चाहिए और इसे किसी तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए। अगर किसान शांति बनाए रखना चाहते हैं, तो सरकार को एक व्यापक नीति बनानी होगी।"
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार ने इन मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो यह आंदोलन एक नया मोड़ ले सकता है। उन्होंने घोषणा की कि 6 नवंबर को बेंगलुरु में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें हजारों किसान हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद इस आंदोलन को हर गांव तक ले जाया जाएगा।
इस बीच, राज्य सरकार और चीनी मिलों को उचित खरीद मूल्य घोषित करने के लिए दी गई समय-सीमा खत्म होने के बाद, 'कर्नाटक राज्य रैथा संघ' और 'हसीरु सेना' के बैनर तले हजारों किसानों ने बेलगावी में 'जेल भरो' आंदोलन शुरू कर दिया।
किसानों ने "कैदी नंबर 5500" लिखी टी-शर्ट पहनी हुई थी और वे गुरलापुर क्रॉस से हिंडलगा सेंट्रल जेल की ओर पैदल मार्च (पदयात्रा) करते हुए आगे बढ़े। मार्च के दौरान उनकी पुलिस बैरिकेड्स पर कुछ देर के लिए झड़प हुई।
इस आंदोलन की वजह से मैसूरु-ऊटी नेशनल हाईवे और पुणे-बेंगलुरु हाईवे समेत कई अहम रास्तों पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ। इसके अलावा बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, धारवाड़ और हावेरी जिलों की सड़कों पर भी असर पड़ा।
किसान 'फेयर एंड रेमुनरेटिव प्राइस' (एफआरपी) के लिए बेस रिकवरी रेट को वापस 9.5 प्रतिशत करने, गन्ने के बकाये का 14 दिनों के भीतर समय पर भुगतान करने और गन्ने की फसल के लिए बीमे की भी मांग कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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