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कर्नाटक में 72,000 सरकारी रिक्तियों को भरने की तैयारी : उपमुख्यमंत्री परमेश्वर

कर्नाटक में 72,000 सरकारी रिक्तियों को भरने की तैयारी : उपमुख्यमंत्री परमेश्वर
कर्नाटक में 72,000 सरकारी रिक्तियों को भरने की तैयारी : उपमुख्यमंत्री परमेश्वर

बेंगलुरु, 28 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार को कहा कि राज्य के विभिन्न विभागों में 72,000 खाली सरकारी पदों को भरने के लिए नोटिफिकेशन जारी किए जा रहे हैं, जबकि बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए सरकारी स्तर पर बातचीत चल रही है।

वह शुक्रवार को बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड्स स्थित श्रृंगार पैलेस में कर्नाटक राज्य सरकार के एससी/एसटी कर्मचारी समन्वय समिति द्वारा आयोजित छठे राज्य-स्तरीय 'ऐक्यता समावेशन' का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे।

परमेश्वर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा के कार्यकाल में लगातार प्रयासों के बाद बैकलॉग रिक्तियों को पहले ही भरा जा चुका था। वह मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ इस मामले पर चर्चा करेंगे और बाकी बची बैकलॉग रिक्तियों को भरने की दिशा में काम करेंगे।

उन्होंने कहा, "समन्वय समिति ने अपनी गतिविधियों के लिए जमीन की मांग की है। समिति उपयुक्त जमीन की पहचान करती है, तो मंत्री केएच मुनियप्पा और मैं इसके आवंटन में मदद करेंगे।"

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवकुमार पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं और इसे आने वाले दिनों में लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "सरकारी कर्मचारियों के सम्मेलनों में एससी/एसटी कर्मचारियों को ज्यादा अहमियत दी जानी चाहिए थी। एससी/एसटी समुदायों के एक लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं, लेकिन आपने मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याओं को मांगों के तौर पर नहीं रखा है। सिर्फ अपनी ताकत दिखाना काफी नहीं है। सरकारी एससी/एसटी कर्मचारियों का संगठन मजबूत होना चाहिए। उनकी आवाज फैसला लेने वालों तक पहुंचनी चाहिए। आपकी ताकत का प्रदर्शन ऐसे तरीके से होना चाहिए, जिसका असर दिखे। जब सभी लोग ऐसे सम्मेलनों के लिए एक साथ आएंगे, तभी इनका सही मतलब निकलेगा।"

परमेश्वर ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की विरासत की ताकत और महत्व को सिर्फ आरक्षण के जरिए सरकारी नौकरी पाने और परिवार चलाने के लिए वेतन कमाने से कहीं आगे बढ़कर समझने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, "यह कहना काफी नहीं है कि आरक्षण की वजह से हमें नौकरी मिली और परिवार चलाने के लिए वेतन मिला। हमें इस बात पर सोचना चाहिए कि यह समुदाय आज भी हाशिए पर क्यों है। जाति व्यवस्था हजारों सालों से चली आ रही है। चाहे कोई माने या न माने, कांग्रेस पार्टी ने ही देश को आजादी दिलाई थी।"

जाति-आधारित भेदभाव की घटनाओं पर दुख जताते हुए उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जिस मंच पर शामिल हुए थे, उसे बाद में शुद्धिकरण की रस्मों से गुज़रना पड़ा था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम को भी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में मदन मोहन मालवीय की मूर्ति का उद्घाटन करने के बाद ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था।

उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण इलाकों में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करने वाले लोग आज भी झोपड़ियों में रह रहे हैं और समाज अभी तक इस स्थिति को बदल नहीं पाया है या उन्हें पक्के घर और पते नहीं दे पाया है।

उन्होंने पूछा, "लगभग 1.20 लाख एससी/एसटी सरकारी कर्मचारी हैं। सभी को ऐसे सम्मेलनों में भाग लेना चाहिए। हमारे सामने चुनौतियां हैं, और हमें यह समझते हुए एक साथ आना होगा कि हमें एकजुट रहने की जरूरत है। एकता की उस भावना के बिना हम आगे कैसे बढ़ सकते हैं?"

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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