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कर्नाटक के एनआरआई ने मतदाता सूची सत्यापन के लिए एक साल की मोहलत देने की मांग की

कर्नाटक के एनआरआई ने मतदाता सूची सत्यापन के लिए एक साल की मोहलत देने की मांग की
कर्नाटक के एनआरआई ने मतदाता सूची सत्यापन के लिए एक साल की मोहलत देने की मांग की

बेंगलुरु, 11 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ एनआरआई समुदाय के सदस्य मोहम्मद मीरान साहेब ने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से आग्रह किया है कि प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को मतदाता सूची सत्यापन और आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए एक वर्ष का समय दिया जाए।

दुबई में वर्ष 1974 से रह रहे मीरान साहेब ने सीईओ को भेजे अपने ज्ञापन में कहा कि विशेष रूप से उडुपी और कारवार जिलों के कई युवा एनआरआई उनसे संपर्क कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या आपत्ति के दायरे में रखे गए हैं।

मीरान के अनुसार, कुछ एनआरआई ने अपने-अपने क्षेत्रों के बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से संपर्क किया। उन्हें कथित तौर पर 20 सितंबर से पहले भारत आकर नागरिकता और अन्य विवरणों से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने की सलाह दी गई।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को सटीक बनाए रखना और निर्वाचन आयोग के नियमों का पालन करना आवश्यक है, लेकिन दशकों से विदेश में रह रहे एनआरआई के लिए इतने कम समय में पुराने दस्तावेज उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से कठिन है।

ज्ञापन में उन्होंने कहा, “कई एनआरआई कई दशकों से भारत से बाहर रह रहे हैं। इतने लंबे समय में संभव है कि उनके पास अब वे पुराने दस्तावेज न हों या उन तक तुरंत पहुंच न हो, जिनकी मांग की जा रही है।”

मीरान ने बताया कि कई एनआरआई हाल ही में भारत में गर्मियों की छुट्टियां बिताकर अपने-अपने देशों में लौटे हैं, जबकि अन्य अपने परिवार और स्कूल जाने वाले बच्चों के साथ विदेश में रह रहे हैं। ऐसे में अचानक भारत की यात्रा करना उनके लिए काफी खर्चीला भी होगा।

उन्होंने मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ एनआरआई केवल दिसंबर की सर्दियों की छुट्टियों में भारत आ सकेंगे, जबकि अन्य को अगले वर्ष जून या जुलाई में मिलने वाली वार्षिक छुट्टी तक इंतजार करना पड़ सकता है।

मीरान ने प्रस्ताव दिया कि जिन एनआरआई के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, आपत्ति के तहत रखे गए हैं या जिनके विवरणों का सत्यापन होना है, उन्हें पूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कम से कम एक वर्ष का समय दिया जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि 20 सितंबर से पहले भारत आने की अनिवार्यता के बजाय एनआरआई को निर्वाचन आयोग या बीएलओ की व्यवस्था के माध्यम से ऑनलाइन प्रारंभिक आवेदन या प्रतिनिधित्व जमा करने और उपलब्ध दस्तावेज अपलोड करने की अनुमति दी जाए।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रारंभिक जांच के बाद अधिकारियों को आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेजों या कमियों की स्पष्ट सूची उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि एनआरआई अगले एक वर्ष के भीतर भारत आने पर संबंधित बीएलओ या निर्वाचन अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर प्रक्रिया पूरी कर सकें।

मीरान ने यह भी आग्रह किया कि जहां कानूनी और प्रशासनिक रूप से संभव हो, वहां भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों या अन्य अधिकृत माध्यमों से भी सत्यापन की व्यवस्था पर विचार किया जाए।

उन्होंने कहा कि केवल कुछ सप्ताह के भीतर भारत नहीं आ पाने के कारण किसी वास्तविक और पात्र मतदाता को स्थायी रूप से मतदाता सूची में अपना नाम बहाल कराने के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

मीरान ने कहा कि एक वर्ष की सुविधा और सत्यापन अवधि देने से कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों के हजारों एनआरआई अपनी सामान्य वार्षिक छुट्टियों के दौरान बिना अनावश्यक कठिनाई के आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि ग्रीन वैली इंस्टीट्यूट के ट्रस्टी मोहम्मद मीरान साहेब ने शिरूर क्षेत्र के विकास में एंबुलेंस और कचरा संग्रहण वाहनों जैसी सेवाएं उपलब्ध कराकर योगदान दिया है। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात से कई भारतीयों की स्वदेश वापसी में भी मदद की थी।

--आईएएनएस

डीएससी

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