प्रियांक खड़गे ने कांग्रेस अध्यक्ष की 'जहरीला सांप' वाली टिप्पणी का बचाव किया, असम के सीएम पर निशाना साधा
बेंगलुरु, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ दिए गए बयानों पर आपत्ति जताई। उन्होंने सरमा पर गैर-जिम्मेदाराना और जाति-आधारित टिप्पणियां करने का आरोप लगाया।
प्रियांक खड़गे ने अपने पिता मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादास्पद 'जहरीला सांप' वाली टिप्पणी का भी बचाव किया।
उन्होंने बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए दावा किया कि भाजपा नेताओं में जातिगत विशेषाधिकार की भावना गहरी जड़ें जमा चुकी है। उन्होंने इसका श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रभाव को दिया।
खड़गे ने आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़ने के बाद सीएम सरमा के विचार बदल गए हैं। इसी तरह की वैचारिक ट्रेनिंग ने उनके बयानों को आकार दिया है। असम के मुख्यमंत्री ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। उन्हें सामाजिक विशेषाधिकार प्राप्त है, जिसके कारण, उन पर कोई आलोचना असर नहीं करती।
उन्होंने कहा कि सीएम सरमा द्वारा दलितों और हाशिए पर पड़े समुदायों के नेताओं के खिलाफ दिए गए बयानों के लिए उनसे पर्याप्त जवाबदेही नहीं मांगी जाती।
खड़गे ने आरएसएस पर 'चातुर्वर्ण' मानसिकता को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया और दावा किया कि जो लोग ऐसी विचारधारा पर सवाल उठाते हैं, उन्हें अक्सर निशाना बनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेता विवादास्पद बयान देते समय खुद को 'परिपक्व समुदायों' का प्रतिनिधि बताते हैं, लेकिन वे 'चातुर्वर्ण' मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाते।
प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए खड़गे ने पूछा कि क्या वे सरमा के बयानों का बचाव करेंगे? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता को एक मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।
अपने पिता की पिछली टिप्पणी का बचाव करते हुए प्रियांक ने स्पष्ट किया कि मल्लिकार्जुन खड़गे की 'जहरीला सांप' से निपटने वाली टिप्पणी एक रूपक थी, जिसका आशय समाज में नफरत फैलाने वाली विचारधाराओं से था।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसी विचारधाराओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए या उनका विरोध किया जाना चाहिए? भाजपा और आरएसएसएस की विचारधाराएं समाज के विभिन्न वर्गों (जिनमें अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग, दलित, आदिवासी और महिलाएं शामिल हैं) की प्रगति और विकास के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसी विचारधाराओं में संविधान के लिए कोई जगह नहीं है।
उन्होंने कहा कि आरएसएस 'मनु स्मृति' के सिद्धांतों में विश्वास रखता है, जबकि कांग्रेस संविधान के साथ खड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा आरएसएस को बढ़ावा क्यों देती रहती है?
उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि इस संगठन को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए किसी राजनीतिक समर्थन की जरूरत नहीं है।
सोमवार को असम के श्रीभूमि जिले में एक चुनावी रैली के दौरान, खड़गे ने कुरान का हवाला देते हुए कहा था कि अगर किसी के सामने से कोई जहरीला सांप गुजर रहा हो, भले ही वह नमाज पढ़ रहा हो, तो उसे नमाज छोड़कर उस जहरीले सांप को मार देना चाहिए।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि मैं कहूंगा कि नमाज तोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता। आरएसएस और भाजपा ही वह जहरीला सांप हैं।
वहीं, असम के मुख्यमंत्री सरमा ने असम के जोरहाट में पत्रकारों को संबोधित करते हुए खड़गे पर तीखा हमला बोला था। सीएम ने उनके बयानों पर सवाल उठाए थे और सख्त भाषा का इस्तेमाल किया था।
सरमा ने कहा था, "खड़गे बूढ़े हो रहे हैं और एक 'पागल' की तरह बोल रहे हैं। आप पहले लोगों का अपमान करते हैं और फिर कहते हैं कि आप विदेश मंत्री से पुष्टि के लिए पूछेंगे?"
--आईएएनएस
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