एनआईसीई परियोजना में कथित अनियमितताओं पर जेडी(एस) का राज्यपाल से हस्तक्षेप का आग्रह, एसआईटी जांच की मांग
बेंगलुरु, 25 अगस्त (आईएएनएस)। जनता दल (सेक्युलर) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना (बीएमआईसीपी) में एनआईसीई कंपनी द्वारा कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जेडी(एस) विधायक दल के नेता सी.बी. सुरेश बाबू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में राज्यपाल को पांच पन्नों का ज्ञापन और हाल ही में आए हाई कोर्ट के फैसले की प्रति सौंपी। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के विधायक और युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी भी शामिल थे।
ज्ञापन में जेडी(एस) ने सात प्रमुख मांगें रखीं। इनमें कथित अवैध टोल वसूली पर तत्काल रोक, एनआईसीई के कब्जे से 554 एकड़ जमीन वापस लेना, विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच और फोरेंसिक ऑडिट, परियोजना का सरकारी अधिग्रहण करने के लिए विशेष कानून बनाना, किसानों को मुआवजा देना, कथित रूप से शामिल अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और झीलों व तालाबों की जमीन को फिर से सार्वजनिक स्वामित्व में लाना शामिल है।
जेडी(एस) ने आरोप लगाया कि करीब दो दशक से किसानों की जमीन बिना उचित मुआवजे के अधिग्रहित रखी गई, जो संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन है। पार्टी का दावा है कि एनआईसीई ने परियोजना से जुड़ी जमीन संयुक्त विकास समझौतों के जरिए निजी डेवलपर्स को बेच दी और झीलों व तालाबों की जमीन का आवंटन भी सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों के खिलाफ किया गया।
ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित 111 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में 25 वर्षों में केवल लगभग पांच किलोमीटर सड़क का निर्माण हुआ, जबकि कंपनी के पास 20,000 एकड़ से अधिक भूमि बैंक बना हुआ है।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि पार्टी ने सरकार को कार्रवाई के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार एनआईसीई परियोजना का अधिग्रहण नहीं करती है तो जेडी(एस) राज्यभर में बड़ा आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी सभी दस्तावेजों के साथ एक वेबसाइट भी जारी करेगी और लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाएगी।
निखिल ने हाईकोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि परियोजना समझौते के अनुसार लागू नहीं की गई और किसानों को मुआवजा भी नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि अदालत ने भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना रद्द कर दी है।
उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत की टिप्पणियों के बावजूद करोड़ों रुपये का टोल वसूला जा रहा है। उन्होंने राज्यपाल से हस्तक्षेप कर सरकार को कार्रवाई सुनिश्चित कराने की अपील की।
बिदादी भूमि अधिग्रहण मामले पर निखिल ने कहा कि 81 किसान हाई कोर्ट पहुंचे हैं और उन्हें न्याय मिलने का भरोसा है। उन्होंने कहा कि अदालत ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं और मामले में आगे की सुनवाई बाकी है।
निखिल कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि राज्य के विभिन्न मुद्दों पर जेडी(एस) भाजपा के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करेगी। साथ ही उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल में बी. नागेंद्र की दोबारा एंट्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री स्वयं अनियमितताओं की बात स्वीकार कर चुके हैं, तो आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को मंत्री क्यों बनाया गया।
--आईएएनएस
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