कर्नाटक-इजरायल साइबर डायलॉग 2026: तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर रहा जोर
बेंगलुरु, 12 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक-इजरायल साइबर डायलॉग 2026 बुधवार को बेंगलुरु में आयोजित किया गया। कर्नाटक सरकार और इजरायली महावाणिज्य दूतावास ने मिलकर इसका आयोजन कराया। 'स्ट्रॉन्गर टुगैदर, सेक्योर टुमारो' थीम के तहत हुए इस संवाद कार्यक्रम का मकसद साइबर सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और डिजिटल लचीलेपन के क्षेत्र में कर्नाटक और इजरायल के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती प्रदान करना था।
कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों के साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधि, स्टार्टअप, शिक्षाविद और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। इसका आयोजन कर्नाटक के ग्लोबल इनोवेशन अलायंस (जीआई) के तहत इजरायली महावाणिज्य दूतावास एवं दक्षिण भारत के ट्रेड मिशन और सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी कर्नाटक (सीवाईएसईसीके) के सहयोग से किया गया।
इजरायल की 10 साइबर सुरक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान तकनीकी प्रदर्शन और कर्नाटक की कंपनियों एवं स्टार्टअप के साथ बी2बी बैठकें हुईं। उद्देश्य केवल अनुभव और जानकारी साझा करना नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी और व्यावसायिक सहयोग के ठोस अवसर तलाशना रहा।
चर्चा में नवाचार एवं स्टार्टअप, उद्योग साझेदारी, प्रतिभा एवं कौशल तथा नीति एवं विश्वास जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे, कारोबार और सार्वजनिक संस्थानों की साइबर सुरक्षा क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कर्नाटक के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी एवं बीटी विभाग की सचिव डॉ. एन. मंजुला ने कहा कि डिजिटल तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक प्राथमिकता बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक अपने मजबूत तकनीकी एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, कुशल प्रतिभाओं, स्टार्टअप, शोध संस्थानों और विशेष साइबर सुरक्षा क्षमताओं के कारण इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए बेहतर स्थिति में है।
मंजुला ने कहा कि कर्नाटक का ग्लोबल इनोवेशन अलायंस विभिन्न देशों के साथ तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा देता है। भारत-इजरायल सहयोग के जरिए साइबर सुरक्षा नवाचार, स्टार्टअप साझेदारी, कौशल विकास, शोध, तकनीकी परीक्षण और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कर्नाटक साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी 2024 और सीवाईएसईसीके की स्थापना का भी उल्लेख किया। राज्य की नीति में साइबर सुरक्षा जागरूकता, कौशल विकास, शोध एवं नवाचार, स्टार्टअप विकास तथा सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया गया है।
मंजुला ने बताया कि सीवाईएसईसीके की टीम ने प्रमुख वैश्विक साइबर सुरक्षा आयोजन ‘साइबरटेक इजरायल’ में हिस्सा लिया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक वैश्विक साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने की संभावनाएं तलाश रहा है, जिसमें भविष्य में बेंगलुरु में साइबरटेक के आयोजन की संभावना भी शामिल है।
उन्होंने तेल अवीव विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के साथ ज्ञान-विनिमय कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे प्रयास दीर्घकालिक संस्थागत एवं तकनीकी साझेदारी का आधार बन सकते हैं।
इजरायल की दक्षिण भारत में महावाणिज्य दूत ओरली वीट्जमैन ने कहा कि यह संवाद भारत और इजरायल के बीच बढ़ती साझेदारी तथा दोनों देशों के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र की पूरक क्षमताओं को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों में समस्या के समाधान पर जोर देने की समान संस्कृति है और शिक्षा, उद्यमिता तथा नवाचार दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। साइबर सुरक्षा उन क्षेत्रों में से एक है जहां भारत और इजरायल के पारिस्थितिकी तंत्र मिलकर प्रभावी काम कर सकते हैं।
वीट्जमैन के अनुसार इजरायल की साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता और उद्यमशीलता को भारत की प्रतिभा, बड़े बाजार और तकनीकी क्षमताओं के साथ जोड़कर व्यापक सहयोग के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में शामिल 10 इजरायली साइबर सुरक्षा कंपनियों ने कर्नाटक की कंपनियों और स्टार्टअप के साथ सीधे संवाद किया। तकनीकी प्रदर्शन और बी2बी बैठकों के जरिए संभावित व्यावसायिक और तकनीकी साझेदारियों को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।
संवाद से सामने आए प्रमुख सुझावों को एक श्वेत पत्र में संकलित किया जाएगा। यह दस्तावेज कर्नाटक में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भविष्य की नीतियों और सिफारिशों को तैयार करने में मददगार होगा।
--आईएएनएस
केआर/

