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कर्नाटक सरकार ने 2030 तक नमक का सेवन 30 प्रतिशत कम करने की योजना शुरू की

कर्नाटक सरकार ने 2030 तक नमक का सेवन 30 प्रतिशत कम करने की योजना शुरू की
कर्नाटक सरकार ने 2030 तक नमक का सेवन 30 प्रतिशत कम करने की योजना शुरू की

बेंगलुरु, 22 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यूटी खादर ने मंगलवार को राज्य भर में नमक की अधिक खपत को कम करने और गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खादर ने नमक की खपत में कमी और स्वस्थ आहार संबंधी आदतों को बढ़ावा देने हेतु कर्नाटक राज्य बहुक्षेत्रीय कार्य योजना का शुभारंभ किया।

यह कार्य योजना बेंगलुरु के विधान सौधा में आयोजित तकनीकी सलाहकार समूह (टीएजी) की बैठक के दौरान शुरू की गई। पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव और राज्यसभा सांसद मंसूर अली खान भी उपस्थित थे।

इस योजना का उद्देश्य भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता के अनुरूप 2030 तक जनसंख्या द्वारा नमक की खपत को 30 प्रतिशत तक कम करना है, साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक के सेवन की सिफारिश की दिशा में प्रगति को बढ़ावा देना है।

सरकार ने कहा कि नमक की अधिक खपत उच्च रक्तचाप से जुड़ी है और स्ट्रोक तथा अन्य हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाती है। अनुमान है कि भारतीय प्रतिदिन लगभग 8-11 ग्राम नमक का सेवन करते हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिश से लगभग दोगुना है।

खादर ने स्वस्थ आहार के माध्यम से गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और आहार संबंधी जोखिम कारकों को कम करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने स्वस्थ आहार संबंधी आदतों पर समन्वित और सतत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कई विभागों को शामिल करते हुए एक राज्य संचालन समिति के गठन का आह्वान किया।

कर्नाटक सरकार ने वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों (एचएफएसएस) से निपटने के लिए पहले ही उपाय लागू कर दिए हैं, जिनके बारे में सरकार का कहना है कि ये स्वस्थ खाद्य वातावरण को मजबूत करने की नींव रखेंगे।

राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयूएचएस) के कुलपति भगवान बीसी की अध्यक्षता में एक तकनीकी सलाहकार समूह का गठन किया गया है, जो नमक की मात्रा कम करने और स्वस्थ आहार संबंधी प्रथाओं पर साक्ष्य-आधारित उपायों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेगा।

इस समूह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जयदेव हृदय रोग विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, एनआईएमएएचएस, शैक्षणिक एवं पोषण संस्थानों और जन स्वास्थ्य संगठनों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हैं।

जयदेव हृदय रोग स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के निदेशक दिनेश बी. ने तकनीकी विचार-विमर्श में भाग लिया। इसी दौरान, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक ज्ञानेश कामथ ने राज्य कार्य योजना के तहत प्रमुख प्राथमिकताओं और प्रस्तावित कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

यह योजना तीन प्रमुख संदर्भों में नमक की खपत पर केंद्रित है: घरेलू उपयोग, घर के बाहर खाया जाने वाला भोजन और प्रसंस्कृत एवं पैकेटबंद खाद्य पदार्थ। इन उपायों में नमक के अनावश्यक उपयोग को कम करना, स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के विकल्पों को बढ़ावा देना, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा कम करने के लिए प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से आहार संबंधी परामर्श को मजबूत करना और पोटेशियम युक्त कम सोडियम वाले नमक पर शोध का समर्थन करना शामिल है।

--आईएएनएस

एमएस/

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