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स्थायी निवासी प्रमाण पत्र पर विवाद के बीच कर्नाटक सरकार ने दी सफाई

स्थायी निवासी प्रमाण पत्र पर विवाद के बीच कर्नाटक सरकार ने दी सफाई
स्थायी निवासी प्रमाण पत्र पर विवाद के बीच कर्नाटक सरकार ने दी सफाई

बेंगलुरु, 21 जुलाई (आईएएनएस)। परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट (पीआरसी) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को इस पहल का जोरदार बचाव किया। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि इसके लिए केवल वही लोग पात्र होंगे, जो राज्य में 10 साल से रह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि, "हम अपनी बेटियों की शादी बांग्लादेशी नागरिकों से नहीं कर सकते।"

मंगलवार को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा, "हमें इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देना होगा। अगर आवेदक यह साबित करते हैं कि वे पिछले 10 साल से कर्नाटक में रह रहे हैं, तो उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।"

बांग्लादेशी प्रवासियों को राज्य में बसाने में मदद करने के आरोपों पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "क्या हम अपनी बेटियों की शादी बांग्लादेशियों से कर सकते हैं? नहीं। हम न तो केंद्र सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं और न ही किसी कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। हम पूरी तरह से कानून के अनुसार काम कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "तहसीलदार पहले भी जाति प्रमाण-पत्र जारी करते रहे हैं। इसमें अब क्या बदलाव हुआ है? विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जाति प्रमाण-पत्र मांगे गए हैं। बीजेपी को समझना चाहिए कि हमने यह व्यवस्था क्यों शुरू की है। सरकार आधिकारिक रूप से ये प्रमाण-पत्र जारी कर रही है और मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता।"

उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्नाटक में जन्मे आवेदकों को स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र (पीआरसी) जारी करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, "ज्यादातर लोगों से 2002 की मतदाता सूची के आधार पर जानकारी देने को कहा गया है। करीब 50-60 प्रतिशत लोगों के पास ऐसे रिकॉर्ड हो सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों के पास स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र नहीं हो सकता है। ऐसे लोगों के लिए पीआरसी मददगार साबित होगा।"

उन्होंने कहा, "एक तरफ बीजेपी नेताओं ने विधानसभा में कई बार आरोप लगाया है कि बांग्लादेशियों और दूसरे राज्यों के लोगों की संख्या बढ़ रही है और उन्हें सरकारी सुविधाएं और आधार कार्ड दिए जा रहे हैं। जब मैं गृह मंत्री था, तब मैंने ऐसे आरोपों का कई बार जवाब दिया था।"

मीडिया के एक सवाल के जवाब में कि सूखा घोषित करने से राज्य के लोगों को क्या फायदा होगा, उन्होंने कहा कि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, "इस फैसले से किसानों और आम लोगों को लाभ मिलना चाहिए। इससे उन लोगों को भी मदद मिलनी चाहिए, जो रोजगार की तलाश में काम न मिलने के कारण पलायन करने को मजबूर हैं। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या वरिष्ठ नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया जाना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता दिल्ली गए हैं। उन्होंने कहा, "अगर हाईकमान मंजूरी देता है, तो कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। मैंने सुना है कि नेता विस्तार के लिए तय किए जाने वाले मानकों पर चर्चा करेंगे। इसमें युवा नेताओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार किया जा रहा है और इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए।"

2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट विस्तार किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "फैसला तय मानकों के आधार पर लिया जाएगा। जब मैं पार्टी का अध्यक्ष था, तब एक मानदंड नए नेतृत्व को बढ़ावा देते हुए कैबिनेट का गठन करना था। मेरा मानना है कि यह मानदंड अभी भी लागू है।"

जब उनसे पूछा गया कि सूखे से प्रभावित जिलों की पहचान कब की जाएगी, तो उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डिप्टी कमिश्नरों को पहले ही जरूरी निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "सूखा प्रबंधन के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पता लगाएं कि किन तालुकों में सूखे जैसी स्थिति है और इसकी रिपोर्ट सौंपें। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।"

सूखा प्रबंधन को लेकर बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पीने के पानी की व्यवस्था के लिए हर जिले को 5 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। उन्होंने कहा, "डिप्टी कमिश्नरों के व्यक्तिगत जमा (पीडी) खातों में कुल 329 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। हमने यह भी घोषणा की है कि हर तालुक को 1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। बीजेपी नेताओं को इन सभी उपायों को समझना चाहिए और जिम्मेदारी से बयान देना चाहिए।"

--आईएएनएस

एसएचके/पीएम

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