चामराजनगर रिजर्व फॉरेस्ट में हुई मुठभेड़ पर कर्नाटक सरकार का जवाब, वनकर्मियों ने आत्मरक्षा में चलाई थी शिकारियों पर गोली
बेंगलुरु, 17 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के चामराजनगर रिजर्व फॉरेस्ट में वन विभाग के कर्मियों की जवाबी फायरिंग में तीन शिकारी मारे गए। शिकारियों के गोली चलाने पर कर्मियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। सरकार ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
विधानसभा में भाजपा नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए वन और पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि शिकारी जंगली जानवरों के शिकार के लिए हथियार लेकर जंगल में घुसे थे और वन अधिकारियों को अपनी जान बचाने के लिए हथियार इस्तेमाल करने का अधिकार है।
रामलिंगा रेड्डी ने कहा, "गोलीबारी के पीछे कोई गलत इरादा या मकसद नहीं था और कहा कि सरकार इस घटना पर विस्तृत बयान देने के लिए तैयार है।
वन अधिकारियों को 14 अगस्त की रात करीब 8 बजे खबर मिली कि शिकारी हथियार लेकर कावेरी वाइल्डलाइफ रिजर्व के हनूर सब-डिविजन के शाग्या इलाके में घुस गए हैं। विभाग ने दो टीमें बनाईं, जो विभाग की दो गाड़ियों से उस इलाके में गईं और हनूर फॉरेस्ट रेंज में तलाशी अभियान शुरू किया।
सुबह करीब 5 बजे टीमों को जंगल के अंदर टॉर्च की रोशनी दिखी और वे उस जगह की ओर बढ़े, जो गांव की सीमा से लगभग पांच किलोमीटर दूर थी। कराडिकल्लू इलाके में वन कर्मियों ने शिकारियों को बड़ी चट्टानों के पीछे छिपे हुए और उन पर गोली चलाते हुए पाया।
रेड्डी ने कहा कि जब वन कर्मियों पर गोलीबारी हुई, तो उन्होंने उसी दिशा में जवाबी गोलीबारी की। उन्होंने कहा कि शिकारी ऊंची जगह पर थे और वन कर्मियों पर लगातार गोलीबारी कर रहे थे।
रेड्डी ने कहा कि कर्मियों ने अपनी जान बचाने के इरादे से गोली चलाई। गोलियां शिकारियों के कमर के ऊपर लगीं। वन कर्मियों का कोई गलत इरादा नहीं था।
उन्होंने कहा कि घायल लोगों की चीखें सुनकर वन कर्मी उनकी ओर बढ़े और तीन लोगों को जमीन पर पड़ा पाया। घायल लोगों को तुरंत कोल्लेगल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तीनों की मौत हो गई। बाद में उनके शव मैसूरु के मुर्दाघर में भेज दिए गए।
मारे गए शिकारी अलग-अलग गांवों के रहने वाले थे, जबकि मौके से भागने वाले एक अन्य कथित शिकारी की पहचान महिमा दास के रूप में हुई है। मंत्री ने बताया कि लगभग 10 वनकर्मियों का भी चोटों के लिए इलाज किया गया। इस घटना के संबंध में मामला दर्ज किया गया है।
रेड्डी ने कहा कि तीनों लोग कथित तौर पर रिजर्व फॉरेस्ट में लगभग आठ किलोमीटर अंदर तक गए थे। परिवारों के इस दावे को खारिज करते हुए कि वे मवेशियों की तलाश में जंगल में घुसे थे। उन्होंने कहा कि उस इलाके में कोई मृत मवेशी नहीं मिला। मंत्री ने यह भी कहा कि शिकारियों के पास रिजर्व फॉरेस्ट में घुसने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों को लगभग 34.5 किलोग्राम संदिग्ध जंगली जानवर का मांस मिला।
मंत्री के अनुसार, यह ऑपरेशन 14 अगस्त की रात करीब 8 बजे शुरू हुआ और 15 अगस्त की सुबह 5.30 बजे तक चला। इस बीच, विपक्ष के नेता आर अशोक ने घटना के बारे में सरकार के बयान पर सवाल उठाए और मौतों के लिए जवाबदेही की मांग की।
अशोक ने विधानसभा में कहा, "लोग सरकार के दावों पर सवाल उठा रहे हैं। जिन लोगों को गोली मारी गई, उन्हें दूर की जगह क्यों ले जाया गया।
कावेरी वाइल्डलाइफ सेंचुरी में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए तीनों लोगों के परिवारों ने विभाग के इस दावे को चुनौती दी है कि वे आदतन शिकारी थे। परिवारों का आरोप है कि वे किसान थे और शिकार से संबंधित किसी काम के लिए नहीं, बल्कि अन्य कारणों से जंगल में गए थे।
--आईएएनएस
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