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कर्नाटक के डिप्टी स्पीकर ग्रामीणों के बेदखली मुद्दे पर भावुक, भूमि अधिकार देने की मांग

हावेरी, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा के उपाध्यक्ष रुद्रप्पा लमानी शनिवार को हावेरी जिले के देवगिरी गांव के पास आयोजित जिला पंचायत प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने जंगल की जमीन से ग्रामीणों को कथित रूप से बेदखल किए जाने का मुद्दा उठाते हुए उनकी स्थिति पर चिंता जताई।
कर्नाटक के डिप्टी स्पीकर ग्रामीणों के बेदखली मुद्दे पर भावुक, भूमि अधिकार देने की मांग

हावेरी, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा के उपाध्यक्ष रुद्रप्पा लमानी शनिवार को हावेरी जिले के देवगिरी गांव के पास आयोजित जिला पंचायत प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने जंगल की जमीन से ग्रामीणों को कथित रूप से बेदखल किए जाने का मुद्दा उठाते हुए उनकी स्थिति पर चिंता जताई।

बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि कई गांव आजादी से पहले से ही वन क्षेत्रों के आसपास बसे हुए हैं, लेकिन अब वन विभाग इन इलाकों को आरक्षित वन बताकर लोगों को बेदखल कर रहा है। ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है और कई लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

उन्होंने बताया कि हावेरी के गुट्टल टांडा और करूर गांव के निवासी पहले ही विस्थापित हो चुके हैं, जबकि राज्य के करीब 22 गांवों के लोग इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं।

लामाणी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में सरकार ने ही इन समुदायों को आवास और रोजगार की सुविधाएं दी थीं, लेकिन अब वन विभाग इन्हें आरक्षित वन क्षेत्र बताकर नोटिस जारी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वह पिछले पांच वर्षों से इस मुद्दे को उठा रहे हैं और इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों व सांसदों से भी मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि एयर-कंडीशंड कमरों में बैठकर सुप्रीम कोर्ट में आदेश पारित किए जा रहे हैं, लेकिन हजारों गरीब लोग कहां जाएंगे, इसका जवाब कोई नहीं दे रहा।

वन विभाग पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि गरीबों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से प्रभावित लोगों के पक्ष में फैसला लेने और उन्हें जमीन के मालिकाना हक (पट्टा) देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल से ही झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को पट्टा देने की बात कही गई थी, लेकिन अब वन अधिकारी मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं और दस्तावेज देने से इनकार कर रहे हैं।

लामाणी ने सवाल उठाया कि अगर एक जनप्रतिनिधि के रूप में उन्हें यह स्थिति झेलनी पड़ रही है, तो आम लोगों का क्या हाल होगा। उन्होंने बताया कि शिगगांव और कोलार में भी लोगों को बेदखली के नोटिस दिए गए हैं और उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को जीने का अधिकार है। अगर उन्हें बेदखली और एफआईआर का डर दिखाया जाएगा, तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।

लामाणी ने जोर देकर कहा कि यह समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में लोग इस संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार से अपील की कि लोगों को वहीं रहने दिया जाए, क्योंकि हर व्यक्ति को जीने का अधिकार है।

--आईएएनएस

डीएससी

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