फिर बढ़ी कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान, शिवकुमार दिल्ली पहुंचे तो सिद्दारमैया ने भी की समर्थकों संग बैठक
बेंगलुरु, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक कांग्रेस में इन दिनों तेज राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और गांधी परिवार के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बेंगलुरु में अपने समर्थकों के साथ बंद कमरे में अहम बैठक की।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, दावणगेरे उपचुनाव को लेकर उठा विवाद अब पार्टी के भीतर खींचतान का कारण बन गया है। कहा जा रहा है कि इस मुद्दे ने शिवकुमार खेमे को सिद्दारमैया समर्थकों के खिलाफ सक्रिय होने का मौका दिया है। वहीं, सिद्दारमैया खेमे की ओर से भी जल्द जवाबी रणनीति सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, दोनों नेताओं ने पहले कई मौकों पर एकजुटता दिखाने की कोशिश की थी, जिसमें संयुक्त कार्यक्रम और नाश्ते की बैठकों जैसी पहल शामिल थीं। लेकिन हालिया घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि उपचुनाव के नतीजों के बाद नेतृत्व को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है।
इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अपने करीबी मंत्रियों के साथ एक अहम बैठक की, जबकि शिवकुमार अपने भाई डीके सुरेश के साथ दिल्ली रवाना हो गए।
दोनों नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर एकजुटता दिखाई है, लेकिन उनके समर्थक विधायकों के बयानों में फर्क साफ नजर आ रहा है। सिद्दारमैया के बेटे और कांग्रेस एमएलसी यतींद्र सिद्दारमैया ने दावा किया कि उनके पिता पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। वहीं, शिवकुमार समर्थक विधायकों का कहना है कि मौजूदा कार्यकाल में ही शिवकुमार मुख्यमंत्री बनेंगे।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान हाल तक पांच राज्यों के चुनावों में व्यस्त था। अब जब वे चुनाव लगभग खत्म हो चुके हैं तो शिवकुमार का दिल्ली पहुंचना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
दूसरी ओर, सिद्दारमैया ने बेंगलुरु के कनिंघम रोड स्थित एक निजी स्थान पर अपने विश्वस्त मंत्रियों के साथ बंद कमरे में बैठक की। इस बैठक में जी. परमेश्वर, के. एच. मुनियप्पा, सतीश जरकीहोली, जमीर अहमद खान और दिनेश गुंडू राव सहित कई मंत्री शामिल हुए।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में कैबिनेट फेरबदल और पार्टी के अंदरूनी मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही यह चिंता भी जताई गई कि मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और उनकी चुप्पी से स्थिति और जटिल हो रही है।
वहीं, दिल्ली में शिवकुमार ने कहा कि उन्हें इस बैठक की जानकारी नहीं है और उन्होंने यह भी कहा कि वे 'कौन करीबी है और कौन नहीं' इस तरह का भेद नहीं करते। उन्होंने संकेत दिए कि सरकार के तीन साल पूरे होने पर कैबिनेट फेरबदल हो सकता है और 20 मई से पहले कुछ 'अप्रत्याशित घटनाक्रम' भी हो सकते हैं।
इससे पहले बजट के बाद सीएम सिद्दारमैया ने कहा था कि राज्य की जनता चाहती है कि वे मुख्यमंत्री बने रहें, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान का होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मौका मिला तो वे दो और बजट पेश करने के लिए तैयार हैं।
--आईएएनएस
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